•मांडलगढ़ राजस्थान उप चुनाव: मैदान में धाकड़, मालवीय और है हाडा, मुशकिल ? कौन जीतेगा कौन गिरेगा आडा :
🌈 मांडलगढ़ [ दिलीप मेहता ] ✍🏻..मांडलगढ़ विधानसभा के उप चुनाव पर रंगत 2–4- दिनो में परवान पर चढे़गी क्योकि मान मनुहार व समझाईश का दौर समाप्त हो गया है। अब चुनावी मैदान में खडे होने वाले प्रत्याक्षी अपने अपने करतब दिखाकर मतदाताओ को कहां तक अपने पक्ष में करने में सफल होगे यह समय शुरू हो गया है।
अभी इन दिनो में चुनावी हमले तेज होगे और आरोप प्रत्यारोप के स्वर भी सुनाई देंगे तथा अफवाहो का दौर भी चलेगा तो चाय की चुस्कियों के साथ अलाव तापते तापते चुनावी चर्चे हर जुबान पर आवाज बिखेरते नजर आयेगे ?
कांग्रेस के विवेक धाकड व भाजपा के शक्तीसिंह अभी तक अपना अपना प्रचार पार्टी की रणनीति से कर रहे है। साथ ही संभावना है कि 19 जनवरी से 3 दिन तक कांग्रेस के दिग्गज नेता सी पी जोशी चुनावी दौरे पर मांडलगढ़ क्षैत्र में रहकर कांग्रेस के प्रति कितना कुछ वातावरण बनाकर धाकड के पक्ष को मतदाता के दिलो में मजबूत करेगे इस पर निगाहे रहेगी ।
जोशी को यहां पर कांग्रेस के लिये वोट मांगने का खुला हक है क्योकि जोशी ने क्षैत्र को चंबल का पानी दिया है और लाडपुरा भीलवाडा सडक मार्ग का तोहफा दिया है तथा मांडलगढ़ में ” मेवाड एक्सप्रेस ” रेल का ठहराव ? इन सुविधाओ से जोशी के प्रति आमजन में सम्मान नजर आ रहा है।
अब मतदाता इस सम्मान के बदले जोशी की बात पर कांग्रेस को वोट देगे या नहीं लेकिन काम हमेशा याद आते रहेगे। भाजपा उपचुनाव जीतने के लिये ताबड तौड काम कर रही है और सरकार ने करोडो रूपयो की स्वीकृतियां जारी भी की है तो कुछ आचार संहिता से अटकी पडी है।
कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलिये चुनाव मैदान में डटे गोपाल मालवीय झुझारू और कर्मठ व्यक्ती रहे है और तन , मन व धन से कांग्रेस की सेवा की है लेकिन वो समय अब चला गया तथा कांग्रेस ने कल ही गोपाल मालवीय के साथ साथ महावीर शर्मा को भी 6 साल के लिये पार्टी से निकाल दिया है ?
निर्दलिय रहने से मालवीय अभी तक तो त्रिकोणिय आसार बना रहे है लेकिन मांडलगढ़ के मतदाता मान मनुहार में भावुक हो जाते रहे है ? दिग्गज नेता शिवचरण माथुर, भंवरलाल जोशी व इंजि. कन्हैयालाल धाकड व बद्रीप्रसाद गुरूजी भी मांडलगढ़ विधानसभा से निर्दलिय भाग्य आजमा चुके है और जीत के आस पास भी नहीं रहे।
उस समय भी भारी भीड व माहोल देखने वाला होता था लेकिन चुनाव की तारीख आते आते फिर मतदाता का मन किसी मनुहार को मान लेता और वोट के निर्णय को इधर से उधर कर देता ।
ऐसा होता आया है।इसका सही अंदाजा 24–25-26- जनवरी के बीच में ही पता चल पायेगा।
जानकारी के अनुसार मालवीय को मिलने वाले वोट कांग्रेस के साथ साथ भाजपा के भी कटेंगे इसमें कोई संदेह नहीं है। पिछले चुनाव पर नजर दौडाई जाये तो मोदी लहर और धाकड के खिलाफ भीतरगात होने के चलते वोट भाजपा को मिले थे और 18540 के मतो से धाकड चुनाव हारे थे अब वो लहर नहीं है।
अबकी बार उन वोटो का फायदा भाजपा को नही मिल पायेगा ? कांग्रेस को नुकसान निर्दलिय मांगीलाल भील के खडे रहने से भी कुछ मात्रा में होगा। खेराड के महुवा व शयामपुरा में मालवीय वोट ज्यादा ले पाये तो कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते है।
फिलहाल यह चुनाव आज के नजरिये से कांटे का माना जा रहा है और गुटबाजी के चलते भीतरगात से दोनो दल प्रभावित होंगे ? देखे अब आने वाले दिनो में कांग्रेस का हाथ भारी पडेगा या भाजपा के फूल पर भी चमक फिकी दिखाई देगी तथा मालवीय की मशीन दोनो की चुनावी लडाई में कितनी मात्रा में वोट रूपी कपडो की सिलाई करेगी या नहीं सभी को इंतजार रहेगा।
फिलहाल काग्रेस की निगाहें प्रचार प्रसार के साथ साथ सी पी जोशी पर टिकी है तो भाजपा की निगाहे बुथ स्तर के साथ साथ सरकार पर टिकी है जिससे उसको कितना फायदा मिल पायेगा तथा मालवीय को अपनो से कितनी आशा रहेगी या निराशा .. आगे समय… कुछ, क्या व कैसा रहेगा .. कौन इस चुनावी जंग में जीतेगा ,,व कौन हार कर गिरेगा .. यह राम ही जाने ?? 🤷🏼♂ 🤷♀




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