लौह पुरुष सरदार पटेल के मुर्ति का विरोध आखिर क्यों…?

✍संकलन By-नवीन सिंह परमार ☎07004127180
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••🔴प्रतिमा क्यों बना दी , 3000 करोड़ लगा दिया ,हाय हाय ,मेरे टैक्स का पैसा हाय हाय मोदी , इतने में तो तीन हस्पताल बन जाते , अरे नही नही इतने में सरदार पटेल के नाम से कॉलेज खुलवा देते जिसमे पढ़ने वाले सभी सरदार पटेल बन जाते 😂
हाय हाय मोदी टैक्स पेयर का पैसा लूट रहा है , मार डाला रे मोदी ने , भला प्रतिमा से क्या रोजगार पैदा होगा ? भला इतने पैसे गरीब लोगों को क्यों न दे दिए , हाय हाय हाय !
ये सब बातें आपने भी जरूर सुनी होंगी और हो सकता है आपको भी ऐसा लगा हो कि यार सचमुच 3000 करोड़ से तो काफी लोगों का भला हो सकता था , चलिए थोड़ा विचार करते हैं
👉दुनिया भर में बड़ी बड़ी प्रतिमाएं बनाने का रुझान है , अमेरिका , चीन , जापान , थाईलैंड , फ्रांस , जर्मनी और गरीब देशों समेत सबने अपने देश के महान पुरुषों के स्मारक बनाएं हैं तथा उन पर गर्व करते हैं क्या ये सभी देश बेवकूफ हैं ?
👉जो भी देशी विदेशी सैलानी घूमने जाते हैं अकसर ऐसे स्मारकों पर जरूर जाते हैं जिससे सरकार को काफी आय होती है , जैसे ताजमहल , लाल किला , अक्षरधाम मंदिर या अनेक दूसरे स्थल प्रसिद्ध हैं लोग वहां घूमने जाते हैं , जिससे आसपास के लोगों को सारी जिंदगी के लिए रोजगार मिलता है । पर्यटन के काम में रेल , बस , हवाई जहाज , होटल , भोजनालय , रिक्शा वाला , दुकानदार सबको रोजगार की प्राप्ति होती है । ये प्रतिमा भी यही करने वाली है इस हिसाब से बड़ी सस्ती इन्वेस्टमेंट है ।
👉 नेहरू जी , इंदिरा जी , राजीव जी आदि लोगों ने 2 गज जमीन के नाम पर दिल्ली में सैकड़ों एकड़ जमीन पर कब्जा किया हुआ है , नेहरू जी के पास 52.6 एकड़ है , इंदिरा जी के पास 45 एकड़ और राजीव जी के पास 15 एकड़ है ,दिल्ली की जमीन की कीमत कई लाख रुपये फुट है ,एक एकड़ में 43560 स्क्वायर फ़ीट जगह होती है , यदि 2 लाख फुट का भाव भी लगाए तो भी केवल 1 एकड़ की कीमत 8,712,000,000 लाख रुपये बनती है , इन सभी की समाधि को इतनी अधिक जमीन की आवश्यकता क्यों है ? क्यों नही दिल्ली जैसे भीड़ वाले सिटी में इनकी जरूरत से अधिक की जमीनों पर गरीब लोगों के लिए घर बनवा दिए जाएं या फिर हस्पताल , या फिर अनाथालय , क्यों कैसा ख्याल है ,जमीन की कीमत लाखों करोड़ होगी , सरदार पटेल पर तो केवल 3000 हजार करोड़ लगा है ।
👉 अभी हाल ही में 26-08- 2018 को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने मोदी जी को पत्र लिखा कि तीनमूर्ति काम्प्लेक्स के नेहरू म्यूजियम और लायब्रेरि में रखी मूर्तियों को न छेड़ा जाए ,उनका स्वरूप न बदला जाए , क्यों काँग्रेसी भाइयो नेहरू की मूर्ति , स्मारक लाइब्रेरी , म्यूजियम इतने प्यारे और सरदार पटेल से इतनी नफरत ? और कांग्रेस के लोग ये भी बताएं कि आजादी के बाद अति गरीब देश में नेहरू जी के रहने के कारण इस जगह पर करोड़ों रुपिया खर्च क्यों किया गया था ? उस समय ये पैसा गरीबों में लगाते तो कितने गरीबों का भला हो जाता , तब तो गरीबी और भुखमरी अब से 10 गुणा ज्यादा थी ।
👉 मनमोहन सरकार ने अपने अंतिम 5 सालों में नेहरू जी , इंदिरा जी और राजीव जी इन पूर्व नेताओं के केवल जन्मदिन और पुण्यतिथि से संबंधित विज्ञापनों पर 142.3 करोड़ का खर्च कर दिया क्यों भई क्या इनसे पर्यटन की आय हो रही थी ? क्यों नही ये पैसा उस समय देश के गरीबों के लिए खर्च किया गया ? 142 करोड़ से एक बढ़िया हस्पताल या स्कूल तो बन ही सकता था ।
👉 योजना आयोग का टॉयलेट तो आपको याद ही होगा , आज सरदार पटेल की प्रतिमा पर आंसू बहाने वाली कांग्रेस ने मनमोहन सिंह जी के राज में दिल्ली में केवल 2 शौचालयों के नवीनीकरण पर ही 35 लाख रुपये खर्च किये थे , क्यों भई काँग्रेसी भाइयो , 35 लाख रुपुये के टॉयलेट के बिना आप लोगों को पोट्टी – सुसु नही आती थी क्या ? इतना पैसा गरीब को देते तो उसका भला होता या नही होता ?
जो विरोधी सरदार पटेल की प्रतिमा पर 3000 करोड़ का रोना रो रहे हैं वे निश्चित ही सरदार पटेल से घृणा करते हैं और उन्हें सम्मान देना नही चाहते वरना इस विशालकाय प्रतिमा और धरोहर से न केवल पूरी दुनिया में भारत का सम्मान बढेगा बल्कि करोड़ों रुपुये सालाना पर्यटन की आय भी होगी और आसपास रहने वाले हजारों लोगों को हमेशा के लिए रोजगार प्राप्त होगा ।




Recent Comments