संजय विजित्वर (हाजीपुर)-हिन्दी साहित्य के प्रख्यात आलोचक, वैशाली के लाल डाॅ0 नंद किशोर नवल का निधन। जी हां, आधुनिक हिन्दी आलोचना के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर डॉ नंद किशोर नवल जी थे । उनके निधन से साहित्य जगत में शोक व्याप्त है।इस क्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष डॉ महेन्द्र प्रियदर्शी ने शोक व्यक्त करते हुए अपने विज्ञप्ति में कहा है कि आलोचना के सशक्त हस्ताक्षर डॉ नामवर सिंह के बाद हिन्दी साहित्य के आलोचकों में डाॅ0 नंद किशोर नवल का नाम सर्वोपरि है और उन्होंने आधुनिक हिंदी कविता के इतिहास के साथ-साथ समकालीन साहित्य का इतिहास भी लिखा है।उनकी रचनाओं में निराला रचनावली का संपादन महत्वपूर्ण है।उनकी समीक्षात्मक दृष्टिकोण सबसे तटस्थ और बेजोड़ । 2 सितंबर 1937 ई0 में वैशाली जिला के हाजीपुर से सटे चांदपुरा में जन्में डॉ नंद किशोर नवल पटना विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में अध्यापन कार्य से जुड़े रहे और सन् 1998 ई0 में अवकाश- प्राप्त होने के पश्चात साहित्य साधना में आजीवन संलग्न रहे।कई पुस्तकों के रचयिता डॉ नंद किशोर नवल के निधन से साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। मिली जानकारी के अनुसार 83 वर्षीय डाॅ नंद किशोर नवल मंगलवार की रात्रि प्रहर में अंतिम सांस ली।उनके निधन पर शोक व्यक्त करनेवाले वैशाली जिला के साहित्यसेवियों में भाषाविद् डाॅ0 नवल किशोर प्रसाद श्रीवास्तव,प्रलेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ ब्रज कुमार पाण्डेय, सुख्यात कवि शालिग्राम सिंह अशांत, अखौरी चंद्रशेखर , भोलानाथ ठाकुर, उमाशंकर उपेक्षित,किरण वार्ता के पत्रिका के डाॅ शैलेन्द्र राकेश, हृदयेश्वर त्रिपाठी, डॉ प्रणव कुमार,संजय शांडिल्य, डॉ राकेश रंजन,विजय कुमार विनीत,प्रवीण सागर, डॉ केकी कृष्ण , सतीश नूतन,मनोरंजन वर्मा, मेदिनी कुमार मेनन, मुकेश कुमार शर्मा,इंदू कौशल, शैलेन्द्र कुमार,रेणु शर्मा,मिनाली प्रियदर्शी,अनिल लोदीपुरी तथा डॉ संजय विजित्वर सहित कई साहित्यसेवी शामिल हैं।