1. सोनपुर । बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से सोनपुर मेला में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से शीतलहर (ठंड) से बचाव हेतु जन जागरूकता अभियान के तहत लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इस नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति सर्वमंगला सांस्कृतिक मंच फुलवारी शरीफ, वाल्मी, पटना के द्वारा दिखाया जा रहा है।
    नाटक की शुरुआत शीतलहर से बचाव गीत- ए भईया सुनअ बतिया हमार, बचके रहअ बहे शीतलहरिया, शीतलहर में घर से बाहर ना निकलह*2 ठंडा से बचके तू घरवें में रहीह, ना त लग जाई ठंडा ए भईया। ठंड लग जईहे त देह लागी काँपे, होवे लागी उल्टी मन मचला के, ईहे हवे ठंडा लगे के पहचान ये भईया, गरम कपड़ा पहन के चेहरा और हाथ- गोर ढक के निकलिह, तबे ठंडा से बचबू ए भईया मानअ आपदा प्राधिकरण के कहनवा……..। इस जीवन रक्षा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को यह सलाह दी गई कि शीतलहर में अनावश्यक घर से बाहर न जाए।खासकर बूढ़े, बच्चे, ब्लड प्रेशर, चीनी और दिल के मरीजों के लिए शीतलहर जानलेवा होता है। ठंड में ब्रेन हेमरेज की भी संभावनाएं बढ़ जाती है इसलिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए विटामिन-सी से भरपूर फल और सब्जियां खाएं। गर्म तरल पदार्थ नियमित रूप से पिए जैसे अदरक, हल्दी, तुलसी, आँवला, नींबू, संतरा, अमरुद, लहसुन, चिकन सूप पनीर चिल्ली शिमला मिर्च गरम, मसाला और खजूर को गर्म दूध में गलाकर खाएं। इससे ठंड से लड़ने के लिए शरीर की गर्मी बनी रहेगी। रूम हिटर, ब्लोअर, जलती हुई लालटेन, दीया, मोमबत्ती, बोरसी और कोयले की आग का प्रयोग करते समय धुएं के निकास का उचित प्रबंध कर ले। उसके उपयोग के बाद उसे अच्छी तरह बुझा दें।बच्चों को सरसों का तेल में जाफर को रगड़ कर उसे मालिश करने से उसका शरीर गर्म रहता है। जहां तक हो सुसुम पानी से नहाए क्योंकि स्नान करने की गलत तरीके से भी ब्रेन हेमरेज हो सकता है इसलिए स्नान करते समय सिर पर सीधे ठंडा पानी ना डालें। पैर से होते हुए ऊपर की ओर डालें । पशुओं को ठंड से बचाने के लिए घर के अंदर रखे और रात में आवास के चारों तरफ से बंद कर दें। जानवरों को बैठने के लिए बथानी को साफ-सुथरा रखें और जुट के बोरे से पूरे शरीर को ढक कर रखिए। गर्म दूध में हल्दी, मीठा और उसके आहार एवं खान- पान में वृद्धि कर दें। ठंड लग जाने पर पशु चिकित्सक से तुरंत सलाह लें। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का सलाह माने। कोई भी आपदा भारी नहीं यदि आप उसकी कर लेंगे पुरी तैयारी। इस नाटक के लेखक एवं गीत की रचना मंच के सचिव महेश चौधरी के द्वारा की गई है एवं इसका निर्देशन मिथिलेश कुमार पांडे द्वारा किया गया है।