सोनपुर।विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले में सरकारी एवं गैर सरकारी विभाग के प्रदर्शनी लगायी गई है । जिसमें जन जागरूकता से संबंधित सरकार की योजनाओं एवं सरकारी लाभ कैसे प्राप्त करें के अलावा भी कई ऐसे पुरानी धरोहर को भी मेले में प्रदर्शित की गई है । जिससे लोग उस वस्तु को देखकर नई पीढ़ी के लोग सदियों पुरानी कलाकृति हो एवं हाथ से बने डिजाइनिंग की गई वस्तुओं को देखे समझे और उस पर अमल करें। ऐसा ही कला संस्कृति युवा विभाग के पंडाल में सम्राट अशोक के काल में बनाया गया यक्षिणी की मूर्ति भी मेलार्थियों को आकर्षित कर रहा है। यह यक्षिमी की मूर्ति बिहार ललित कला अकादमी के निजी सहायक देव पूजन कुमार ने रविवार को बताया कि यक्षिणी की मूर्ति दीदारगंज के समीप गंगा नदी के किनारे से 18 अक्टूबर 1917 को मिली थी । मूर्ति चुनार के बलुआ पत्थरों से बनी 5 फीट 2 इंच लंबी मूर्ति है । दीदारगंज में गंगा किनारे एक धोबी धरती में धंसे एक पत्थर के टुकड़े पर कपड़े धोता था । 1 दिन पत्थर के पास एक साँप घूम रहा था साहब को ढूंढने के क्रम में यक्षिणी की मूर्ति मिली उसके बाद से उसे बिहार संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है । उसकी एक प्रतिमा बनाकर मेले में लोगों को देखने के लिए लगाया गया है । इस प्रदर्शनी में कला संस्कृति युवा विभाग के प्रदर्शनी में मिथिला पेंटिंग के विभिन्न प्रकार के राजा महाराजाओं महलों के चित्र के अलावा भी कई तरह के कलाकृति प्रदर्शित की गई है । लोग बड़ी उत्सुकता से यक्षिणी के दूसरा स्वरूप देख कर उसे कैमरे में भी कैद कर रहे हैं। साथ ही यह भी लोगों को इस कलाकृति के द्वारा संदेश दिया जा रहा है कि अपने जीवन के अंदर जो छुपा कला है उसे प्रदर्शित जरूर करें । लोग पेंटिंग के बारे में विभाग के कर्मचारियों से पूरी जानकारी भी ले रहे हैं । कला संस्कृति युवा विभाग के पंडाल में भगवान गौतम बुद्ध, डाकू अंगुलिमाल, गुरु नानक ,योगा साधना ,मछली, पतंग का अस्तित्व ग्रामीण परिवेश में महिलाओं के मिथिला पेंटिंग के माध्यम से दर्शाया गया है ।