दैनिक खोज खबर/सोनपुर। प्रखंड अंतर्गत विभिन्न पंचायतों में आयोजित विशेष फार्मर रजिस्ट्री शिविरों का गुरुवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी अरोमा मोदी ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने डुमरी बुजुर्ग, हासिलपुर, रसूलपुर, नयागांव, गोविंदचक, चतुरपुर एवं गोपालपुर पंचायतों में चल रहे शिविरों की जमीनी हकीकत जानी और कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बीडीओ ने कहा कि इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य उन सभी पात्र किसानों को जोड़ना है जो अब तक इस सुविधा से वंचित हैं। पंजीकरण के लिए सरकारी रिकॉर्ड में जमाबंदी और पहचान पत्र के विवरण का मिलान कर प्रक्रिया पूरी की जा रही है, ताकि किसानों को सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

पैतृक जमाबंदी बनी पंजीकरण में सबसे बड़ी बाधा:

निरीक्षण के दौरान शिविरों में पहुंचे किसानों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी व्यावहारिक समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया। ग्रामीणों और किसानों का कहना था कि प्रखंड क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं, जिनकी भूमि आज भी उनके पूर्वजों या पैतृक नाम से ही जमाबंदी में दर्ज है। वर्तमान में वे स्वयं उस भूमि पर खेती और देखभाल कर रहे हैं, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड जमाबंदी में उनका अपना नाम अपडेट नहीं होने के कारण तकनीकी रूप से उनका फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। इस विसंगति की वजह से वास्तविक किसान सरकार की विभिन्न महत्वाकांक्षी कृषि योजनाओं और अनुदानों का लाभ लेने से महरूम हो रहे हैं।

किसानों ने प्रक्रिया सरल करने की लगाई गुहार :

पैतृक नाम से चल रही पुरानी जमाबंदी के स्थान पर वर्तमान वास्तविक उत्तराधिकारी भूस्वामी का नाम दर्ज करने की सरकारी प्रक्रिया को बेहद सरल और त्वरित बनाया जाए। जटिल नियमों के कारण वंशावली और नाम सुधार में लंबा वक्त लग जाता है, जिससे मौजूदा शिविरों का पूरा लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए भी शिविरों में ही विशेष व्यवस्था की जाए, ताकि वास्तविक अन्नदाताओं को फार्मर रजिस्ट्री का अधिकार और उचित सरकारी सहायता समय पर मिल सके।