सुरक्षित मातृत्व अभियान की गुणवत्ता में होगी बढ़ोतरी

गुणवत्ता आश्वासन के लिए होगा मासिक एवं त्रैमासिक मूल्यांकन

महीने की 9 वीं तारीख को स्वास्थ्य केंद्रों पर चलाया जाता है अभियान

गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच से सुरक्षित प्रसव में हो रही बढ़ोतरी

छपरा:-गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच के माध्यम से सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जा रहा है। प्रत्येक महीने की 9 वीं तारीख को प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर यह अभियान चलाया जाता है। जिसमें गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच की सुविधा उपलब्ध कराते हुए उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के कुशल प्रबंधन पर बल दिया जाता है।

अपर सचिव एवं मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन दिल्ली ने पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की गुणवता में बढ़ोतरी के लिए गुणवत्ता आश्वासन टीम द्वारा मासिक एवं त्रैमासिक मूल्यांकन के विषय में निर्देशित किया है। पत्र के माध्यम से बताया गया है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रसव पूर्व जांच की गुणवत्ता में सुधार लाना है इसके लिए अब से प्रत्येक माह जिला गुणवत्ता आश्वासन टीम मातृत्व स्वास्थ्य नोडल एवं प्रजनन मातृ नवजात, शिशु एवं किशोरी स्वास्थ्य पर कार्य करने वाले अन्य सहयोगी संस्थाओं की मदद से अभियान का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही स्वास्थ्य की इकाई के अधीक्षक द्वारा अभियान की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए त्रैमासिक अभियान का मूल्यांकन किया जाएगा इसके लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित अभियान की वेबसाइट पर वेब आधारित सहायक पर्यवेक्षण टूल बनाया है जिसकी सहायता से अभियान का मूल्यांकन किया जाएगा। प्रत्येक माह की 11 वीं तारीख को जिला गुणवत्ता आश्वासन टीम द्वारा फीडबैक देना होगा। मासिक रिपोर्ट जिला एवं राज्य के साथ संबंधित अधिकारी को भी भेजी जाएगी।

सुरक्षित प्रसव में हुई है बढ़ोतरी:

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास में काफी सफलता मिली है। स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता के साथ अभियान को सफल बनाने में आशाओं की भूमिका भी सराहनीय है आशाएं सामुदायिक स्तर पर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उसे प्रत्येक महीने की 9 वीं तारीख को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ रेफेरल इकाइयों पर प्रसव पूर्व जांच के लिए ससमय संदर्भित करती है एवं खुद भी उपस्थित होती है।

इस अभियान के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को बेहतर प्रसव पूर्व जांच की सुविधा प्रदान करने एवं सुरक्षित प्रसव को सुनिश्चित करने के लिए उच्च रक्तचाप, वजन की माप, गर्भावस्था के दौरान मधुमेह, यूरिन अल्ब्यूमिन, हीमोग्लोबिन एवं ब्लड ग्रुप की जांच के द्वारा उच्च जोखिम वाले गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें समुचित इलाज उपलब्ध कराया जाता है।

जिले में कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड की भी व्यवस्था की गई है जिससे गर्भ के अंदर पल रहे बच्चे की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाता है जिससे फीटल प्रजेंटेशन कहते हैं। इससे प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में कमी आती है। उन्होंने बताया कि प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्त स्राव से महिला की जान जाने का खतरा सबसे अधिक होता है। प्रसव पूर्व जांच में यदि खून 7 ग्राम से कम पाया जाता है तब ऐसी महिलाओं का आयरन की गोली के साथ पोषक पदार्थों के सेवन के विषय में सलाह भी दी जाती है। गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अत्यधिक या कम वजन एवं अत्यधिक खून की कमी प्रसव सम्बंधित जटिलता को बढ़ा सकता हैं। इस दिशा में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृव योजना प्रभावी रूप से सुदूर गांवो में रहने वाली महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है एवं इससे मातृ एवं शिशु मृत्यू दर में भी अंकुश लगाने में सफलता मिल रही है।