*सीवान : बदहाल महाराजगंज पीएचसी की कहानी… बीमार पत्नी को लेकर लाचार पत्रकार की जुबानी*
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✍दैनिक खोज खबर के लिए महाराजगंज से विकास कुमार के साथ विपेंद्र कुमार की रेपोर्ट
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सीवान/महाराजगंज पीएचसी की दिन प्रतिदिन विगड़ती हालत को लेकर आए दिन मरीजों से डॉक्टर व स्टाफ से तू-तू मै-मै की स्थिती उत्पन्न हो रही है।पीएचसी ने न तो ढंग की व्यवस्था है और न ही डॉक्टर के आने जाने का समय।यहाँ कार्यरत मेडिकल कर्मियों के लिए ड्यूटी राजउ नौकरी है।जब मन हो काम किये नहीं तो अपनी मर्जी।
गुरूवार की रात्रि थाना क्षेत्र के पसनौली निवासी पत्रकार विकाश कुमार एक डीलिवरी केश लेकर पीएचसी पहुचे।अस्पताल पहुचने पर डाँक्टर अस्पताल से नदारद। लाचार पत्रकार द्वारा वहा मौजूद कम्पाउण्डर से डाँक्टर के बारे में पुछा गया तो कम्पाउण्डर का कहना था कि डाँ.साहब नही है।डॉक्टर साहब का नम्बर माँगा गया तो मौजूद कम्पाउण्डर ने कहा कि नम्बर बाटने के लीए नही है और नम्बर देने से इंकार कर दिया।तब विकाश ने 9.34 बजे रात्रि को सीएस सीवान को फोन पर इन हालात की जानकारी देते हुवे इलाज हेतु गुहार लगाई। खैर  डॉ एसएस कुमार आए और पाँच मीनट तक अस्पताल में बैठे और बिना रोगी देखे ही चले गए।पुनः पत्रकार ने सीपीएम को फोन कर के शिकायत किया।तब डाँक्टर योगेन्द्र सिंह आये और दश पन्द्रह मीनट बैठ कर चिकित्सा सामान न होने का बहाना बना कर चल दिये।
सोंचने वाली बात ये है कि जब एक मीडिया कर्मी के साथ अस्पताल प्रबंधन इस ढंग से पेश आता है तो आम लोगों के साथ यहां कैसा व्यवहार किया जाता होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
जब इस वाकये की सूचना अन्य मीडिया कर्मियों को लगी तो उहोंने वहा पहुचकर इलाज हेतु आग्रह किया व मौजूद कुव्यवस्था पर आपत्ति की।हॉस्पिटल में देखा गया कि जहाँ,मरीज का डाँ चेकअप करते हैं वहा कुत्ता घुम रहा था रात्रि प्रहरी आराम से चादर ओढ़ सोये हुए था।
बदहाल अस्पताल की हालात देखने सुनने वाला कोई नहीं है।
पीएचसी के पुछताछ मे 10.00 बजें पहुचे कर्मी से पुछा गया अपकी डय्टी कितने बजे से है ।तब उन्होने कहाँ की बैठने का कुर्सी नही तो हम बैठे कहा, हल्ला मचा तो एक बैठने को एक अदद कुर्सी आयी।
अस्पताल में वेजाइनल एग्जामिनेशन हेतु ग्लोब्स तक नहीं था।दवा की बात ही तो अलग।
हॉस्पिटल के गेट से घुसने के साथ ही नरकिय स्थिती से पाला पड़ता है।नाला का पानी नाली से ओभरफ्लो कर चारों तरफ फैला हुवा है।सीवियर इन्फेक्शन व महामारी फैलने का डर है।