भागवत के अनुसार जीवन के चार सूत्र बताए गए हैं-संत श्री प्रमोद कृष्ण जी महाराज
#प्रवेज़ अख्तर/सिवान

सिवान
जिले के महाराजगंज अनुमंडल मुख्यालय स्थित रामेश्वरम धाम मंदिर पर श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ एवं वार्षिक उत्सव के शुभ अवसर पर बृहस्पतिवार संध्या भागवत कथा सुनाने वृंदावन से श्रद्धेय संत श्री प्रमोद कृष्ण जी महाराज उदासीन जी ने भागवत कथा के प्रथम दिन जीवन के सूत्र की व्याख्या करते हुए श्रोताओं से कहां की जीवन के चार सुत्र होते हैं।
*व्यवसायिक जीवन
*सामाजिक जीवन
*परिवार जीवन तथा
* निजी जीवन श्रद्धेय संत श्री प्रमोद कृष्ण जी महाराज ने बड़े ही सरल भाषा में जीवन के इन 4 सूत्रों को समझा रहे थे कि प्रथम यदि आपका जीवन व्यावसायिक हैं तो, व्यवसायिक जीवन पूर्ण रूप से परिश्रम पर आधारित होता है। जितना सच्चा परिश्रम होता है व्यवसायिक तरक्की उतनी ही अधिक मजबूत होती हैं। सच्चे मन से किया किया परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता है अर्थात इन यूं कहें कि सत्य पर टिका रहता है व्यवसाय तों कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।दुसरा आता है।

सामाजिक जीवन- समाजिक जीवन में पारदर्शिता की आवश्यकता होती है। सनातन धर्म में जन्म लिये है और यदि सामाजिक जीवन को धन्य बनाना हैं तो पारदर्शिता की अहम आवश्यकता होती हैं। उदाहरण के तौर पर संत श्री प्रमोद कृष्ण जी महाराज ने बताया कि भेदभाव कला ऊपर से दिखावटी बातें अंदर कुछ और तो ऐसी चीज है सामाजिक जीवन में बाधा डाल सकते हैं सामाजिक जीवन धन्य नहीं हो सकता है। तीसरा सुत्र
परिवारिक जीवन- परिवारिक जीवन के मूल्य चीज होती है वह प्रेम होता है। प्रेम के अभाव में पारिवारिक जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती हैं। परिवारिक जीवन में सबसे जरूरी और अहम चीज जो होती है वह प्रेम होती है यानी पारिवारिक जीवन की नीब होती है, वह प्रेम होती हैं, और जितनी अच्छी प्रेम होगी पारिवारिक जीवन उतना ही उज्जवल और तरक्की वान होगा। और अंत में आता है वह है।
निजी जीवन-निजी जीवन पर व्याख्या करते हुए श्रद्धेय संत श्री प्रमोद कृष्ण जी महाराज उदासीन ने बड़े ही श्रद्धा भाव से निजी जीवन की मूल्यों पर चर्चा किया संत श्री ने कहा कि निजी जीवन का तात्पर्य केवल पति पत्नी से होता है अर्थात निजी जीवन का मूल आधार पवित्रता होता है। पवित्रता पर चर्चा करते हुए संत श्री ने कहा कि निजी जीवन को मजबूती प्रदान करनी है निजी जीवन को सफल बनाना है निजी जीवन को सार्थक बनाना है तो जरूरत होती है पवित्रता की और जितनी ही दोनों लोग पवित्र होंगे निजी जीवन उतना ही सफल ऊर्जावान सार्थक और मधुर होगा। उपरोक्त चारों सूत्र भागवत कथा प्रवचन काल के दौरान जीवन के चार सूत्र अपने जीवन में ग्रहण करने के तरफ आकर्षित करते हुए श्री श्री ने युवाओं से सनातन धर्म कि मर्यादा का पालन करना भारत की मूल संस्कृति को बचाए रखने के तरफ युवाओं का ध्यान आकृष्ट करा रहे थे । मौके पर अतुल सिंह, भोला सिंह, गुड्डू सिंह ,पप्पू सिंह, राजेश कुमार सिंह के अलावे सैकड़ों की तादाद में महिलाएं मौजूद रही।




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