सिवान :बेटियों की पुकार सुन, दहेज मुक्त बिहार चुन
#न्यूज़ इनपुट -परवेज़ अख्तर 

सीवान-
नये बिहार की नई सुबह-दहेज प्रथा की नहीं जगह, इन दिनों ऐसे सैकड़ों नारे बिहार की गली-गली में गूंजते सुनाई देतीे हैं। सदियों पुरानी इस कुप्रथा को नेस्तनाबूत करने को आज बिहार जाग उठा है। जो महिला सशक्तिकरण की एक नई पहल, एक नई क्रांति के तहत हमारी बेटियां अब और जुल्म नहीं सहेंगी। दहेज को ना कहेंगी और बाल-विवाह के खिलाफ भी उठ खड़ी होंगी। प्रखंड मुख्यालय स्थित मध्य विद्यालय मझवलिया के तत्वाधान में मंगलवार को बाल विवाह व दहेजप्रथा उन्मूलन के व्यापक प्रचार-प्रसार तहत कला जत्था के कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से बताया कि बाल विवाह व दहेजप्रथा समाज के लिए कलंक हैं। इस कला जत्था का मुख्य उद्देश्य गांव-गांव में इस कुप्रथा को समाप्त करना हैं। कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का काम किया।

भूतपूर्व शिक्षक हिटलर प्रसाद सिन्हा ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इससे लोगों में बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ अच्छा संदेश जायेगा और लोग इसके प्रति जागरूक भी होंगे। शिक्षक मोहम्मद यूनुस की *बेटियों की पुकार सुन, दहेज मुक्त बिहार चुन* के नारे से पूरा वातावरण तालियों से गूंज उठा।
मौके पर शिक्षक अरुण कुमार, जवाहर सिंह, सुनील शंकर, जितेंद्र कुमार यादव, शैलेश कुमार, रमिता कुमारी, कन्हैया तिवारी, रंभा देवी, शिवजी सिंह, अमरजीत कुमार, अजीत कुमार, सौरभ कुमार श्रीवास्तव, मुन्ना कुमार, साक्षर भारत के प्रेरक पंकज कुमार श्रीवास्तव व संगीता देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।