जदयू छात्र संघ ने प्रदेश नेतृत्व के फैसला से चुनाव मे लिया है हिस्सा, विरोध करने वालो पर हो सकती है कारवाई-उपाध्यक्ष

छपरा (वि वि)

छात्र जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष रणवीर सिंह ने कहा कि छात्र जदयू के विश्वविद्यालय बैठक में 8 फरवरी 2018 को संगठन के द्वारा यह फैसला कर लिया गया था कि छात्र संघ चुनाव अगर होगा तो उस में भाग लिया जाएगा लेकिन कुछ संगठन के नेता छात्र संघ चुनाव में भाग लेने का विरोध करने की बात कर रहे हैं जिसकी सूचना प्रदेश अध्यक्ष को दे दी गई है प्रदेश अध्यक्ष निश्चित ही अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगे छात्र जदयू कभी भी चुनाव में भाग नहीं लेने का ऐलान नहीं किया है छात्र संघ चुनाव कराने की प्रक्रिया का विरोध हमेशा मजबूती के साथ उठाई है और संघर्ष की है छात्र संघ चुनाव हो रहे हैं जिस तरह से हो रहे हैं उस तरफ से ऐसा लग रहा है कि लोकतंत्र की प्रथम पाठशाला की हत्या कर दी गई है एक छात्र संगठन को जिताने हेतु का 75% अटेंडेंस करने के लिए उनका रजिस्टर गायब करके दूसरा रजिस्टर बना कर जनप्रतिनिधि एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के दबाव में महाविद्यालय प्रशासन जिस तरह से रद्द कर रहा है यह घोर निंदनीय है स्पष्ट है यह चुनाव अगर विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसा ही चुनाव कराना था तो उस संगठन के एक पदाधिकारी को बुलाकर जीत की सर्टिफिकेट सारी दे देते इतना ड्रामा करने का क्या जरूरत है लड़ाई जयप्रकाश विश्वविद्यालय में स्पष्ट है जयप्रकाश विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार के चार्ज सीटेट पूर्व कुलपति विजेंद्र गुप्ता के साथियों के साथ गलबहियां करने वाले और दूसरे निरंतर जयप्रकाश विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अराजकता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले छात्र संगठन के बीच है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से उस संगठन के दबाव में आकर लगातार गलत निर्णय ले रहे हैं कभी भी इतिहास इन चीजों को भूलेगा नहीं माफ नहीं करेगा जिस तरह से कल छात्रसंघ चुनाव नॉमिनेशन में गुंडों को माध्यम से महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय नंगा नाच किया गया एक पार्टी के कार्यकर्ता उसके विचार परिवार संगठन के सारे लोग जिस तरह से नंगा नाच कर रहे थे इससे प्रतीत होता था कि यह चुनाव छात्रों का चुनाव नहीं है यह चुनाव गुंडों का चुनाव है चुनाव में छात्र भाग ले तो समझ में आता है लेकिन इसमें तो 70 वर्ष के लेकर 40 वर्ष तक के लोग है , उनके विचार परिवार के पार्टी के कार्यकर्ता नंगा नाच कर रहे थे इससे प्रतीत होता है कि वह लोग चुनाव में बुरी तरह से पराजित हो गए हैं यह जान चुका है कि चुनाव अगर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुसार हुए तो हम लोग किसी भी कीमत पर चुनाव नहीं जीत पाएंगे इसलिए यह सारी रचनाएं रची जा रही है।