साईकिल पर सवार होकर सपना ने लिखी बदलाव की कहानी
• प्रतिदिन 15 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर जाती थी ड्यूटी
• साईकिल वाली दीदी के नाम से हो गयी मशहूर
• सिविल सर्जन ने की कार्यों की सराहना

छपरा: कैसे आसमान में सूराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों। दुष्यंत कुमार की यह पंक्तियाँ हौसलों को पंख देती है। दृढ़ इच्छा एवं निरंतर प्रयास विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता दिला सकती है। इस बात को सारण जिले के गड़खा प्रखंड के इटवा गांव की सपना रानी ने बख़ूबी समझा है और इसे साबित कर दिखाया है। वह आज अपने क्षेत्र में अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के लिए मिसाल बनी चुकी है। प्रतिदिन 15 किलोमीटर पैदल चलकर नियमित ड्यूटी पर जाने वाली सपना की कहानी काफी उतार-चड़ाव से भरी रही है। आशा के तौर पर कार्य शुरू करते हुए प्रखण्ड सामुदायिक उत्प्रेरक बनने तक के सफ़र में सपना ने समुदाय के लिए कई बड़े बदलाव किए। उनके इस योगदान को स्वास्थ्य विभाग ने बख़ूबी समझा एवं सपना को आशा कार्यकर्ता से प्रखण्ड सामुदायिक उत्प्रेरक के पद पर कार्य करने का मौका भी दिया।
आशा से बनी आशा फैसलिटेटर: सपना ने आशा के पद पर कार्य करते हुए कई बदलाव के लिए जानी जाती है। सपना ने संस्थागत प्रसव, टीकाकरण एवं गृह आधारित नवजात देखभाल पर विशेष बल दिया। वह पैदल ही अपने क्षेत्र की सभी घरों का दौरा करती थी एवं महिलाओं को जागरूक किया करती थी। उनके अथक मेहनत का नतीजा रहा कि गाँव की तस्वीर बदली। संस्थागत प्रसव में काफी बढ़ोतरी दर्ज हुयी। साथ ही जिन इलाकों में टीकाकरण सबसे कम हुआ करता था, वहाँ भी टीकाकरण में काफी वृद्धि हुयी। उनके बेहतर कार्यों को देखते हुए अस्पताल कर्मियों ने सर्वसम्मति से सपना को आशा फैसलिटेटर की जिम्मेदारी दी।
15 किमी दूरी पैदल तय कर जाती है थी पीएचसी: आशा फैसलिटेटर बनने के बाद सपना को गड़खा पीएचसी भी जाना पड़ता था। उनके घर से गड़खा पीएचसी की दूरी करीब 15 किलोमीटर दूर है। सड़क पर वाहनों की कमी थी। सवारी गाड़ियां कम चलती थी। साथ ही घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण भी सपना को घर से पैदल ही 15 किलोमीटर चलकर पीएचसी जाना पड़ता था।
साइकिल वाली दीदी का मिला तमगा: वह अपना कार्य हमेशा ईमानदारी से करती रही। घर से अस्पताल एवं आस-पास के क्षेत्र में वह हमेशा पैदल ही यात्रा करती थी। इस दौरान उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। फिर सरकार ने सभी आशा फैसलिटेटर के लिए साईकिल की सुविधा मुहैया करायी। साइकिल पाकर सपना के कार्य में और वृद्धि हुयी। एक आशा फैसलिटेटर को 10 से 20 आशाओं को सहयोग प्रदान करती है। सपना ने साइकल से ही सभी आशाओं के क्षेत्र का दौरा करना शुरू किया। वह घूम-घूम कर लोगों से मिलने का कार्य भी शुरू की। उनके इस समर्पण को गाँव वालों ने भी सराहना की। अब वह अपने गांव में साईकिल वाली दीदी के नाम से मशहूर हो गयी है।
बीसीएम बनकर अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा: सपना ने यह साबित कर दिया है कि अगर आप जो ठान ले वह कर सकते हैं। अपनी कड़ी मेहनत व लगन के बदलौत सपना को सफलता मिलती गयी। सपना के बेहतर कार्य को देखते हुए 12 फरवरी 2019 को सपना का चयन प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक(बीसीएम) के रूप में चयन हो गया। सपना ने बताया गाँव में अभी भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। अपने कार्य के प्रति निष्ठा एवं सच्ची लगन के सहारे स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। फिलहाल सपना सारण जिले के परसा प्रखंड के पीएचसी में बीसीएम के पद पर कार्यरत है और वह काफी मेहनत से अपना कार्य कर रही हैं।
सिविल सर्जन ने की कार्यों की सराहना: सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्व झा ने सपना रानी के कार्यों के सराहना करते हुए कहा विभाग के लोगों की आवश्यकता है, जो अपने कर्तव्यों का सही तरीके निवर्हन कर सके। उन्होने कहा अन्य कर्मियों को सपना से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।




Recent Comments