मोतिहारी:-फर्जी डिग्रीधारी चिकित्सकों की जिले में भरमार, गंभीर बीमारी से लेकर सर्जरी कर मार रहे मरीज को       
दैनिक खोज खबर मोतिहारी: पूर्वी चंपारण फर्जी डिग्रीधारी चिकित्सकों का हब बनते जा रहा है। कई तो ऐसे चिकित्सक बन गए हैं जो कल तक एमआर का काम करते थे और आज गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। अब इनके द्वारा किस प्रकार का इलाज किया जाता होगा इसे सहज समझा जा सकता है। 
वहीं कुछ चिकित्सकों के यहां कंपाउंडरी का कार्य करनेवाले भी चिकित्सक बन गए हैं। कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने डिप्लोमा की डिग्री ली है, लेकिन डॉक्टर के बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर शहर में चिकित्सा करते दिख जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति तो और भयावह है, वहां फर्जी चिकित्सकों की भरमार देखने मिल रहा है। सभी के बोर्ड पर बिना डिग्री के ही विशेषज्ञता लिखी मिल जाएगी। 
कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने सामान्य चिकित्सा की डिग्री ली है, जिसमें आयुर्वेदिक एवं यूनानी इलाज शामिल है, लेकिन इनके द्वारा बड़ी-बड़ी सर्जरी की जा रही है। इसके चलते आए दिन मरीजों की मौत हो रही है। पिछले एक सप्ताह में तीन मरीजों की मौत फर्जी डिग्रीधारी चिकित्सकों के कारण हुई है। बड़ी रकम देकर मामले को मैनेज किया जाता है।
ऐसे चिकित्सकों ने दलाल पाल रखे हैं, जो मरीजों को फंसा कर लाते हैं। इसमें रिक्शावाले से लेकर आशा एवं ममता शामिल है। ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी हॉस्पीटल में भी फर्जी चिकित्सकों के दलाल सक्रिय हैं जो मरीजों को फंसा कर लाने का कार्य करते हैं।
डायबिटीज से लेकर कैंसर विशेषज्ञ तक बने हुए हैं फर्जी चिकित्सक:-बताया गया है कि जिला मुख्यालय में कई चिकित्सक ऐसे हैं जो फर्जी डिग्री के सहारे डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी के इलाज का दावा करते हुए मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे चिकित्सक हैं जिन्होंने एमडी भी नहीं किया है और वे कैंसर जैसी बीमारी का इलाज करने का दावा कर रहे हैं। इसके चलते डिग्रीधारी चिकित्सकों की साख को बट्‌टा लग रहा है। 
आईएमए, नीमा एवं होम्योपैथिक चिकित्सक संघ को इस प्रकार के चिकित्सकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सरकार को लिखना चाहिए, लेकिन कई ऐसे लोग इनके संघ में शामिल हो गए हैं जो चिकित्सकीय अहर्ताओं को पूरी नहीं करते।
कई महिला चिकित्सकों के पास सर्जरी की डिग्री नहीं है, लेकिन वे गर्भवती महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन करती मिल जाएंगी। जबकि इसके लिए कमसे कम एमएस की डिग्री होनी चाहिए। वहीं कई महिलाएं फर्जी डिग्री पर चिकित्सक बनी बैठी हुई हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग के लिए कामधेनु बने फर्जी चिकित्सक:-कुछ वर्ष पूर्व जिला प्रशासन की पहल पर फर्जी चिकित्सकों को चिह्नित करने के लिए कमेटी बनी थी, लेकिन इस कमेटी ने कितने चिकित्सकों को चिह्नित किया इसकी रिपोर्ट आज तक स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं हैं। 
बताया जाता है कि 165 फर्जी चिकित्सकों को चिह्नित किया गया था, लेकिन उनपर कोई कार्रवाई के बदले इनसे मोटी रकम लेकर उन्हें मरीजों की जान से खिलवाड़ करने की छूट दे दी गई। हालांकि सिविल सर्जन प्रशांत कुमार कहते हैं कि नई कमेटी गठित की गई है, जो फर्जी चिकित्सकों को चिह्नित करेगी।
साभार :-खबर आपतक डेस्क,