माँ यूथ ऑर्गनाइजेशन द्वारा मेहंदी प्रतियोगिता का किया गया आयोजन, ज्योति कुमारी रही अव्वल

दैनिक खोज खबर डेस्क, सारण

सावन का पवित्र माह कई त्योहारों को एक साथ लाता है। इस माह का धार्मिक महत्व के साथ-साथ सांस्कृतिक महत्व भी है। इसी के क्रम में जलालपुर के जीएस बंगरा में संचालित माँ यूथ आर्गेनाईजेशन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के छिपे हुये हुनर को उभारने के उद्देश्य से मेहन्दी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

प्रखण्ड के विभन्न गांवों से आई लगभग 90 युवतियों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया जिनमें प्रथम स्थान संवरी की ज्योति कुमारी, द्वितीय स्थान मिश्रवलिया की नंदिनी मिश्रा और तृतीय स्थान रुदलपुर की नाहिद परवीन को प्राप्त हुआ। मेहंदी।प्रतियोगिता में बेहतर करनेवाली 15 अन्य महिलाओ को भी सम्मानित किया गया।

निर्णायक मंडली में संगठन की महासचिव राठौर जया सोनल, बंगरा की रीना सिंह, मिश्रवलिया की रिंकी मिश्रा, संवरी की प्रियंका कुमारी और सनम कुमारी शामिल थी।

श्रीमती रिंकी मिश्रा ने प्रतिभागियों को पुरस्कृत करते हुवे कहा कि भारतीय संस्कृति में त्यौहारों का बहुत अधिक महत्व है, त्यौहारों से आपसी प्रेम व सौहार्द का वातावरण बनता है। इन त्योहारों में मेहन्दी की बहुत अधिक उपयोगिता होती है।

इस अवसर पर रीना सिंह ने कहा कि किसी के जीवन में मेंहदी से कलात्मक नवाचार व सृजनशीलता को बढ़ाने में सहायक होती हैं और इससे नारी सशक्तिकरण को बल मिलता है।

इस कार्यक्रम में महासचिव जया सोनल के द्वारा मेहंदी की महत्ता, मेंहदी रचना एवं प्राचीन काल से उसका जीवन से लगाव के बारे में बताया गया। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में मेहंदी लगाना हमारी संस्कृति हो चुकी हैं।

श्रृंगार के रूप में इसका विशेष महत्व है। मेहंदी सुहाग का प्रतीक है, और मेंहदी की यही खासियत इसे सोलह श्रृंगारो में सबसे खास मानी जाती है। आज के युग मे भी शादी व्याह के अतिरिक्त विविध त्योहारों- करवा चौथ, रक्षाबंधन, भाई दूज आदि उत्सवों पर भी मेहंदी लगाने का परंपरा बन गयी है। मेहंदी का औषधीय महत्व भी कम नही है। आज मेहंदी रचना मनोरंजन, शिक्षा व रोजगार का साधन बन गया है। इससे महिला रोजगार हासिल कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकती है।

इस अवसर पर प्रतिभागियों में गजब का उत्साह देखने को मिला। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली संवरी की ज्योति ने कहा कि मेहन्दी ही ऐसी कला है जो दूसरों के हाथों में ज्यादा रंग बिखेरती है। यह सिखाती है कि स्वार्थ से अधिक परमार्थ का रंग खिलता है। ख़ुद घिस के औरों को रंगीन करना मेहन्दी सिखाता है।

कार्यक्रम में अध्यक्ष शशि शेखर, राठौर श्रीमान्त, अमित बांड, विनोद राय, अमरेन्द्र सिंह, रोशन सिंह, विशाल गोस्वामी, नवीन, अभिषेक, सत्येंद्र, रोहित, दीपक सुमित, रविशंकर, राजू आदि ने सहयोग किया।