
माँझी। बिहार में नीतीश के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पूरी तरह से जन-विरोधी है। इस सरकार में अभी तक जो भी नीतियां बनाई गई है वे सारी नीतियां किसान-मजदूर व छात्र-नौजवान विरोधी रही है। कोरोना काल में किसी तरह वापस घर लौटे मजदूरों के साथ बिहार सरकार का व्यवहार लोग आज भी भूले नही है।बेरोजगारों को रोजगार व रोटी देने में केंद्र व बिहार की नीतीश सरकार पूरी तरह से नाकाम रही है। इस बार का चुनाव महागठबंधन रोटी, कपड़ा, मकान व रोजगार के मुद्दे पर लड़ रहा है। जनता पूरी तरह बदलाव का मन बना चुकी है। महागठबंधन के उम्मीदवार डॉ सत्येंद्र यादव के पक्ष में रोड शो के दौरान कोपा, दाउदपुर, बरेजा, ताजपुर व मांझी के मियांपट्टी आदि बाजारों पर लोगों को सम्बोधित करते हुए
जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्षा आई सी घोष ने कही। उन्होंने कहा कि जनता नीतीश सरकार को करारा जवाब देने को तैयार बैठी है। बिहार के लोग लड़ाकू होते हैं। जिस नीतीश सरकार ने बाहर से आने वाले लोगों को एक बस तक नहीं उपलब्ध करा सकी वह आज बिहार के गरीब मजदूरों की हिमायती बन रही है। लोगों के घाव अभी भी भरे नही है। इसीलिए एनडीए के नेता व मंत्री जब क्षेत्र में जा रहे हैं तो सवालों से उनका स्वागत कर रहे हैं। उन्होंने 3 नवंबर को माकपा के चुनाव चिन्ह हसुआ हथौडा व तारा छाप पर बटन दबाने और एनडीए सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील की। रोड शो के दौरान बाइक रैली में बड़ी संख्या में समर्थक शामिल थे। उनके साथ हैदराबाद यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष अभिषेक आनंद, राज्य कमेटी सदस्य अहमद अली, प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र यादव, सीपीएम नेता अरुण सिंह, गोविंद पासवान, मोशब्बीर हुसैन, राजद नेता विनय कुमार, मुल्तान खान, शैलेश यादव, सुखदेव यादव, सैफ अली, आरिफ खान, आकिब खान, बहारन यादव आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे।
सभा का संचालन जुबेर अहमद ने किया।




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