मधेपुरा:चौसा में आयोजित ग्यारह दिवसीय भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है
⏭कलयुग में मानव भक्ति तो करता है लेकिन ज्ञान वैराग्य से कोसों दूर है-नारायण दास जी महाराज
जनता उच्च विद्यालय चौसा के मैदान में आयोजित ग्यारह दिवसीय भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है।
सर्वधर्म समन्वय सनातन भागवत परिवार के सौजन्य से आयोजित श्रीमद् भागवत महाकुम्भ में आए साधु ,संत रामकथा व शिव कथा पर आधारित विभिन्न प्रसंगों के कथावाचन से यहां का माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
भागवत कथा के दूसरे दिन सर्वधर्म समन्वय सनातन भागवत परिवार के संस्थापक नारायण दास जी महाराज राधेय ने पाप,पूण्य,निंदा प्रसंग की विस्तृत रूप से चर्चा की। वहीं उनके साथ आये आधे दर्जन से अधिक संतों द्वारा संगीतमय भजन कीर्तन की प्रस्तुति कर श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
सरल संत श्री नारायण दास जी महाराज राधे ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमें ना तो किसी की निंदा सुननी चाहिए और ना ही निंदा करनी चाहिए यह मनुष्य के लिए सबसे बड़ा पाप है।भगवानके अनन्य भक्त प्रहलादजी कहते हैं जो व्यक्ति केवल अपने कुटुम्बियों के पेट पालने में लगा रहता है कभी भगवद भजन नहीं करता, वह विद्वान भी हो तो भी उसे परमात्मा की प्राप्ति नहीं हो सकती। उसका कभी उद्धार नहीं हो सकता। यह अपना है यह पराया है। पशु बुद्धि हैं। इस पशु बुद्धि के कारण ही ऐसा भक्त भेदभाव पैदा होता है।
उन्होंने कहा कि इस संसार में मनुष्य जन्म बडा दुर्लभ है। इस मनुष्य जन्म में श्रीकृष्ण भगवान के चरण कमलो की शरण लेना ही जीव की एकमात्र सफलता है।श्री हरि की अखंड स्मृति बनी रहे तो मनुष्य सहज है। इस दुरुस्त संसार सागर को पार कर सकता है। भगवान और भक्तों के चरित्र धन यश और आय की बृद्धि करने वाले पदम पवित्र और अत्यंत मंगलमय है। कलयुग के प्रभाव से भक्ति निर्बल हो गई है। कलयुग में मानव भक्ति तो करता है लेकिन ज्ञान वैराग्य से कोसों दूर है। इसलिए भक्त होते हुए भी मानव के अंदर भक्ति के लक्षण दिखाई नहीं देते।गीता में लिखा है जो इस अयक्त अक्षर का सुमिरन करता है, जो लिखने में नहीं आता, पढ़ने में नहीं आता, जो बोलने में नहीं आता, जो मेरे उस आदिनाम नारायण-नारायण को जानता है। वह परमपद को पाता है।
इस अवसर पर स्थानीय प्रीटी कुमारी,खुशबु कुमारी,नेहा कुमारी, ऋतू कुमारी कृष्ण व राधा के वेष धारण कर जैसे ही ज्ञान मंच पर पहुंचे तो पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।कार्यक्रम के सफल आयोजन में पूर्व मुखिया सूर्यकुमार पट्वे,चमकलाल मेहता,अनिल मुनका, रामशंकर चौरसिया, नित्तम अग्रवाल, नरेश ठाकुर निराला, प्रो.विजय कुमार, राजकिशोर पासवान, बिन्देश्वरी पासवान, कैलाश पासवान, कुंजबिहारी शास्त्री, धनराज भगत, आदि की भूमिका सराहनीय रही।





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