नवादा : पोषण अभियान के लिए श्रेयसी सिंह को बनाया गया सद्भावना दूत

ロ सद्भावना दूत एवं आईसीडीएस के मध्य हुआ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर

ロ पोषण पखवाड़े को सफ़ल बनाने में देंगी महत्वपूर्ण योगदान

ロ राज्य में 8 से 22 मार्च तक मनाया जाएगा पोषण पखवाड़ा

रिपोर्ट – सन्नी भगत /नवादा: अर्जुन पुरस्कार सम्मानित निशानेबाज श्रेयसी सिंह को पोषण अभियान के लिए सद्भावना दूत बनाया गया है. इसके लिए श्रेयसी सिंह एवं समेकित बाल विकास सेवा निदेशालय बिहार के मध्य समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया है.
पोषण पखवाड़े से जागरूकता की होगी शुरुआत: बिहार पूरे देश का पहला राज्य है जिसने पोषण अभियान को सफ़ल बनाने के लिए किसी खिलाडी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है. पोषण में सुधार लाने के लिए महिलाओं का जागरूक होना बेहद जरुरी होता है. इसके लिए श्रेयसी सिंह 8 मार्च से 22 मार्च तक जिले में चलाए जाने वाले पोषण पखवाडा के विषय में महिलाओं के लिए रोल मॉडल साबित होगी. साथ ही वह राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर सन्देश के माध्यम से पोषण पर अलख जगायेंगी.इस अवसर पर सहायक निदेशक आईसीडीएस श्वेता सहाय ने श्रेयसी सिंह को पोषण अभियान के लिए सद्भवना दूत बनाये जाने पर उनको धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्हें राज्य की हर महिला के लिए प्रेरणा स्रोत बताया. उन्होंने बताया कि पोषण में सुधार के लिए सामुदायिक जागरूकता जरुरी है. पोषण के सन्देश को आम लोगों के बीच मजबूती से रखने में श्रेयसी सिंह का योगदान अहम होगा. इनके माध्यम से लोग पोषण की जरूरत को और बेहतर रूप से समझ पायेंगे.पोषण पखवाड़े के दौरान जिले में जिला स्तरीय पोषण मेला, प्रखंड स्तरीय पोषण रैली, ग्राम स्तरीय आँगनवाड़ी केन्द्रों पर एनीमिया कैंप, अन्नप्राशन दिवस, गोद्भराई दिवस एवं बाल्यवस्था देख-रेख दिवस जैसे कार्यक्रम राज्य के प्रत्येक जिले में आयोजन कैलेंडर के अनुसार आयोजित की जाएगी. इसके लिए सभी जिलों को पत्र के माध्यम से निर्देशित भी किया जा चुका है.यह है पोषण अभियान: राष्ट्रीय पोषण मिशन योजना का शुभाराम्भ प्रधानमंत्री द्वारा 8 मार्च 2018 को किया गया है. योजना का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायती राज एवं लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए वर्ष 2022 तक 0 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों में बाधित विकास को राष्ट्रीय स्तर पर 38 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक कम करना है. बच्चों के कुपोषण दर में प्रति वर्ष 2 प्रतिशत एवं किशोरी एवं महिलाओं के एनीमिया दर में प्रति वर्ष 3 प्रतिशत की कमी लाना है. इसके अंतर्गत अन्नप्राशन, गोदभराई उत्सव, क्रमिक क्षमता विकास, सूचना एवं संचार समर्थित वास्तविक समय आधारित निगरानी एवं पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता हेतु नवाचार गतिविधि का आयोजन किया जा रहा है.