नवसवंत्सर विक्रम संवत् की वैज्ञानिकता व प्रासंगिकता विषयक संगोष्ठी आयोजित 
👉हमारी संस्कृति में नवसवंत्सर की शुरूआत की तिथि को ही हुई थीं  सृष्टि रचना- 
      डाक्टर रविन्द्र पाठक 
 👉हमारा सवंत्सर बदलता है उस वक्त समाज में ही नहीं बल्कि प्रकृति में परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगता है –
डाक्टर अशोक प्रियंबद 
👉मानसिक गुलामी का प्रतीक है अंग्रेजी कैलेंडर 
💧भारतीय संस्कृति में नवसवंत्सर की शुरूआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होता है ।गुलामी के दिनों में अंग्रेजी कैलेंडर के प्रभाव में आ जाने के कारण भारत की संस्कृति व प्रकृति के अनुकूल मनाये जाने वाला भारतीय नवसवंत्सर अब गुमनाम होता चल रहा है ।यें बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर बिहार प्रांत के सम्पर्क प्रमुख डाक्टर रविन्द्र पाठक ने रविवार को नवसवंत्सर स्वागत समिति, सीवान के तत्वावधान में शहर के मखदुम सराय स्थित महावीरी सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में नवसवंत्सर विक्रम संवत् की वैज्ञानिकता व प्रासंगिकता विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहीं ।उन्होंने कहां कि हमारी संस्कृति मे जिस दिन से सृष्टि का शुभारंभ हुआ, उसी दिन से हमारा नवसवंत्सर शुरू होता है ।
डाक्टर पाठक ने कहा कि आज भी जनमानस से जुङी हुई सभी आयोजन व मांगलिक कार्य विक्रम संवत् के अनुसार ही होते है ।बस आवश्यकता है कि हम एक बार मानसिक गुलामी से अपनो को मुक्त कर के अपनी संस्कृति विरासत को अंगीकार करते हुए वैज्ञानिक सिद्धान्तों पर आधारित अपनी कालगणना को स्वीकार करते हुए अपने दैनिक जीवन में भी अंग्रेजी कैलेंडर के स्थान पर भारतीय संस्कृति के अनुरूप अपने विक्रम संवत् की कैलेंडर को अपना लें ।वहीं संगोष्ठी में विषय प्रवेश कराते हुये वरिष्ठ पत्रकार डाक्टर अशोक प्रियंबद ने कहा कि हमारी संस्कृति में जिस समय हमारा सवंत्सर बदलता है उस वक्त समाज में ही नहीं बल्कि प्रकृति में परिवर्तन दृष्टिगोचर होने लगता है ।हमें हजारों वर्षों की मानसिक गुलामी को छोड़ कर के वैज्ञानिक व व्यवहारिक दृष्टि से परिपूर्ण विक्रम संवत् को अपने दैनिक जीवन में नवसवंत्सर के स्वीकार करने का समय आ गया है ।उन्होंने कहा कि समाज परिवर्तन की चल पङा है बस आवश्यकता है कि हम इस परिवर्तन की शुरूआत अपने घरों से प्रारम्भ करें ।

संगोष्ठी को डाक्टर रामचन्द्र सिंह, डाक्टर राकेश तिवारी व लोजपा के जिलाध्यक्ष अभिषेक कुमार सिंह ने भी संबोधित किया ।संगोष्ठी का संचालन नवसवंत्सर स्वागत समिति के सह संयोजक नवीन सिंह परमार ने करते हुए नवसवंत्सर विक्रम संवत् को जन-जन तक कैसे पहुंचाया जाए, इस विषय पर समिति की योजनाओं के संबंध में विस्तार से प्रकाश डाला ।संगोष्ठी की अध्यक्षता समिति के संयोजक व प्रसिद्ध सर्जन डाक्टर विनय कुमार सिंह ने करते हुए लोगों का आह्वान किया कि हम सभी लोगों नवसवंत्सर विक्रम संवत् को आम जनमानस में व्यवहारिक रूप से स्थापित करने इस आंदोलन की शुरूआत अपने घरों से करें ।संगोष्ठी में स्वागत भाषण रविरंजन श्रीवास्तव ने किया वहीं एकात्मकता मंत्र का पाठ आचार्य सुनील कुमार के द्वारा किया गया ।इस मौके पर रामचन्द्र प्रसाद, सरोज वर्णवाल, दामोदर प्रसाद, प्रभात रंजन, जादूगर विजय, हिन्दूवेन्द्र उपाध्याय,राजेश पाण्डेय,  राघव जी राय,मनोज कुमार, राहूल चौरसीया, मनीष कुमार वर्मा, आलोक कुमार वर्मा, डाक्टर अमित कुमार, डाक्टर विजय पाण्डेय, पशुपति नाथ सिंह, उत्पल पाण्डेय, दयाशंकर प्रसाद, श्रीराम सिंह, भोला जी सहित सैकड़ों की संख्या में नगर के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे ।