निजी विद्यालय के प्राचार्य ने पठन-पाठन की ली जिम्मेदारी

देवेन्द्र कुमार सिंह।दैनिक खोज खबर/रसूलपुर (एकमा)। यदि हौसले बुलंद हों तो शारीरिक विकलांगता या संसाधनों की कमी लक्ष्य प्राप्ति में आड़े नहीं आती. इसे साबित कर दिखाया है वर्ग नौवीं का छात्र शिवम ने. एकमा प्रखंड अंतर्गत चनचौरा पंचायत के बंशी छपरा गांव निवासी बढ़ई मिस्त्री आसनारायण शर्मा का इकलौता पुत्र शिवम दोनों हाथ पांव से दिव्यांग है इसके बावजूद दिव्यांग रिक्शा चलाकर रोजाना ढ़ाई किलोमीटर की दूरी तय कर रसूलपुर गांव स्थित संचालित मां भारती सेंट्रल स्कूल में पठन-पाठन करने समय पर विद्यालय आता है और अपनी भविष्य संवारने के जुगत में दिन रात परिश्रम कर रहा है. उसके जज्बे को लोग सलाम कर रहे हैं. बातचीत में शिवम का कहना है कि हमारा संपूर्ण फोकस अभी मैट्रिक की परीक्षा पर है,मैट्रिक परीक्षा में बेहतर अंको से उत्तीर्ण होने के बाद हीं हम तय कर पाएंगे कि हमें क्या बनना है. बातचीत के दौरान कुछ कर दिखाने के जज्बे से लबरेज उसका चेहरा देख लग रहा था कि मानों शारीरिक विकलांगता कोई समस्या है हीं नहीं. खास बात यह देखने को मिली कि शिवम में प्रतिभा की भी कोई कमी नहीं है. शिवम की प्रतिभा देखकर भी लोग हैरत में हैं. मां भारती सेंट्रल स्कूल के प्राचार्य सह संस्थापक उमाशंकर चौबे ने शिवम के पठन-पाठन की जिम्मेदारी ली है. प्राचार्य श्री चौबे कहते हैं कि कई विद्यालय शिवम का नामांकन करने से भी कतराते थे पर हमारा विद्यालय तीन वर्ष पहले हीं नामांकन कर लिया. शिवम को विद्यालय में भी भरपूर प्यार व दुलार मिलता है जो सराहनीय है. जरूरत है ऐसी दिव्यांगो व प्रतिभावन को सहयोग करने की जो स्थानीय स्तर पर किसी भी सांसद, विधायक,मुखिया या सरकार से नहीं मिल पा रही है. शिवम सरकार द्वारा मिलनेवाली हर सुविधाओं से उपेक्षित है.




Recent Comments