सरकार का नीरा निर्माण उद्योग हो रहा असफल

रसूलपुर/एकमा-स्थानीय थाना क्षेत्र में मौसमी पेय ताड़ी उतारने वालों ने भी इसके उपभोक्ताओं से कोरोना प्रोटोकोल के तहत ताड़ी बेच रहे हैं।उपभोक्ताओं के लिए मास्क पहनना, दूरी बना कर बैठना और खुद का वर्तन लाकर ताड़ी पीना अनिवार्य बना दिया है।सूत्रों के अनुसार ताड़ी बेचने वालों पर भी प्रशासन की नजर है।गश्ती के दौरान पुलिस प्रशासन ने ताड़ी उतारने वालों को सख्त हिदायतें दे रखी हैं कि कोरोना प्रोटोकोल और सरकारी गाइडलाइंस के उलंघन पाये जाने पर विक्रेता और उपभोक्ता दोनों को दंडित होना पड़ेगा।ताड़ी उतार कर बेचने वाले पासियों की माने तो मास्क के अभाव में मुंह पर गमछा बांध कर ही उपभोक्ता आते हैं।आबादी से दूर गांव व चट्टी बाजार से दूर इसे बेचा जाता है। बहुत से उपभोक्ता इसके चलंत दुकानों से ताड़ी खरीद घर पर पीते हैं।इस पारम्परिक पेय को सरकार द्वारा नीरा के रूप में बेचने का प्रावधान किया गया था जो सफल नहीं हो सका है।शराब बंदी के बाद नीरा बना कर इसे आधुनिकतम तरीके से सरकार ने कारोबार करने हेतु प्रशिक्षण भी शुरु की थी पर दृढ़ इच्छा शक्ति के अभाव में ठंडे बस्ते में पड़ गया।बुद्धिजीवियों की मानें तो इसे लोग शराब के वैकल्पिक रूप में उपयोग करते हैं।नीरा निर्माण कर इसका वृहत व्यावसायिक रूप सरकार दे सकती है।