• अब सामान्य बच्चों को तरह बोल रही है शाबिया परवीन
• लौट आयी परिवार की खुशियां

छपरा / 15 फरवरी: जिले के दरियापुर प्रखंड के फुरसतपुर गांव निवासी एकरारूल हक अंसारी की 7 वर्षीय पुत्री शाबिया परवीन अब सामान्य बच्चों की तरह बोल सकती है. पैसों की तंगी के कारण एक समान्य बच्चे की तरह अपनी बेटी की स्पष्ट आवाज सुनने की उम्मीद एकरारूल हक अंसारी ने लगभग छोड़ ही दी थी. लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के सहयोग से एकरारूल हक अंसारी का सपना साकार हो चुका है. इस पर अपनी ख़ुशी का इजहार करते हुए एकरारूल हक अंसारी ने बताया उनकी बेटी को नया जन्म मिला है. जन्म से ही उनकी बेटी का तालू कटा था. जन्म से कटे तालू के कारण 7 साल की शाविया परवीन न तो सही तरीके से खाना खा पाती थी और न स्पष्ट बोल पाती थी. सीमित आमदनी के साधन होने के कारण वह चाहकर भी बड़े अस्पताल में अपनी बेटी का ऑपरेशन नहीं करवा सकते थे. उनके पूरे परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी. लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के सहयोग से उनकी बेटी शाबिया परवीन का सफल ऑपरेशन पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुआ. अब शाबिया परवीन एक सामान्य बच्ची की तरह खा सकती है एवं बात भी कर सकती है.

स्कूल पर आरबीएसके की टीम ने किया चिन्हित:
जन्मजात कटे-फटे होठों और अन्य विकृतियों से जूझ रहे बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) वरदान सिद्ध हो रहा है। शाबिया परवीन के पिता एकरारूल हक अंसारी बेटी की ऑपरेशन की उम्मीद छोड़ चुके थे. लेकिन एक दिन गांव के प्राथमिक विद्यालय फुरसतपुर में आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के तहत टीम:2 के डॉ. नीरज तिवारी और डॉ. प्रीति कुमारी के द्वारा उसकी स्क्रिनिंग की तथा उसे बेहतर इलाज के लिए डीआईसी सेंटर छपरा रेफर किया गया। यहां उसके तालू का अपरेशन के लिए पीएमसीएच रेफर कर दिया गया जहां पर उसका सफल ऑपरेशन हुआ। अब बच्ची सामान्य बच्चों को तरह बोलते नजर आ रही है।

क्या है क्लेफ्ट पैलेट:

आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने बताया शरीर में जन्मजात होने वाली इस विकृति को अंग्रेजी में क्लेफ्ट पैलेट कहते हैं। इससे रोगी के मुंह के अंदर तालू का पूरा विकास नहीं होता है। मुंह के उपरी हिस्से से नाक तक गहरा घाव जैसा आकार बन जाता है। कुछ बच्चों में यह कटे हुए का निशान ऊपरी होठ तक आ जाता है और उनके कटे हुए होठ दिखाई देते हैं। इस विकृति से बच्चे को बोलने और सुनने की समस्या भी होती है। बोलने पर आवाज नाक से आती है। साथ ही कटे होंठ व तालू की वजह से बच्चे को अपनी मां का दूध पीने, खाना खाने में भी दिक्कत होती है।

38 प्रकार की बीमारियों का समुचित इलाज :
आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत बच्चों में 38 तरह की बीमारियों की जांच कर उसका समुचित इलाज किया जाता है। इन सभी बीमारियों को चार मूल श्रेणियों में बांटकर इसे 4 डी का नाम दिया गया है। जिन तीस बीमारियों का इलाज किया जायेगा, उसमें दांत सड़ना, हकलापन, बहरापन, किसी अंग में सून्नापन, गूंगापन, चर्म रोग, नाक रोग त्वचा की बीमारी (खुजली, फफूदीय संक्रमण एवं एक्जिमा),मध्यकर्णशोथ, आमवाती हृदयरोग, प्रतिक्रियाशील हवा से होने वाली बीमारियां, दंत क्षय, ऐंठन विकार, न्यूरल ट्यूब की खराबी, डाउनसिंड्रोम, फटा होठ एवं तालू/सिर्फ़ फटा तालू, मुद्गरपाद (अंदर की ओर मुड़ी हुई पैर की अंगुलियां), असामान्य आकार का कुल्हा, जन्मजात मोतियाबिंद, जन्मजात बहरापन, जन्मजात हृदयरोग, असामयिक दृष्टिपटल विकार आदि शामिल है।