मशरक । भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा अनलॉक-1 के लिए जारी गाईडलाइन्स को लेकर मुख्य सचिव बिहार के द्वारा बिहार के सभी जिलाधिकारियों के साथ रविवार की शाम में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर समीक्षा करने के बाद सोमवार से प्रखंड की सभी दुकानें खुल गई। सुबह ही इंस्पेक्टर बालेश्वर राय की मौजूदगी में थानाध्यक्ष रत्नेश कुमार वर्मा ने जमादार श्याम बिहारी पांडेय और पूरे दल बल के साथ माइक से कोरोना वायरस से बचने के उपाय जैसे मास्क सेनेटाइजर के बारे मे बताते हुए चल रहे थें। इंस्पेक्टर बालेश्वर राय ने प्रचार के माध्यम से बताया कि सभी दुकानों को सरकार के तरफ से खोलने का आदेश मिला है पर कुछ सावधानियों पर विशेष ध्यान देना है। दुकानों पर पांच से ज्यादा ग्राहको को नही बुलाना है।साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना है। दुकान पर हाथ धोने का उपाय और सेनेटाइजर के इस्तेमाल की व्यवस्था रखनी होगी। सोमवार की सुबह से ही हल्के चहल पहल के साथ बाजार में पहले जैसा रौनक आने की संभावना बन रही है। दुकानदार भी ख़ुशी-ख़ुशी दुकान खोलने के साथ ही साफ सफाई में भिड़े दिखें। मानो कोई त्यौहार आने वाला है। अब दुकानें तो खुल गई, बाजार भी सज गया लेकिन ग्राहकों की कमी महसूस हो रही है। यह सीज़न शादी समारोह की हुआ करती थी जो इस बार लाॅकडाउन के चलते बाजारों में रौनक कम रहेगी। बाजारों में पहले जैसा रौनक आने में शायद थोड़ा दिन और लग सकता है। फिर भी दुकानदारों में उम्मीद जगी है कि सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा। थानाध्यक्ष रत्नेश कुमार वर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा दिए गए गाइडलाइन में ऑनलौक में छूट सुबह पाँच बजे से रात्रि के नौ बजे तक के लिए दी गयी है। रात्रि के नौ बजे से सुबह के पाँच बजे तक लॉकडाउन रहेगा। रात्रि के नौ बजे से सुबह के पाँच बजे तक कोई वाहन नहीं खुलेंगे। मॉल को छोड़कर सभी प्रकार की दुकानें निर्धारित अवधि में खुलेंगी परन्तु किसी भी दुकान में एक समय पाँच ग्राहक से ज्यादा नहीं रहेंगे। दुकानदारों को सेनिटाइजर रखना होगा और साफ-सफायी पर विषेष ध्यान देना होगा। दुकान में कार्य करने वाले सभी लोग मास्क का उपयोग करेंगें और ग्राहकों को भी उसके लिए प्रेरित करेंगे।

• यातायात का नियमों का पालन लाॅकडाउन की तरह करें :

लाॅकडाउन में यातायात संबंधी दुर्घटना एक दम से ना के बराबर रही। कारण है कि अनावश्यक घरों से बाहर न निकलना। यातायात के नियमों का पालन करते हुए दोपहिया वाहनों का उपयोग अति आवश्यक कार्य के लिए करते हुए हेल्मेट तथा बाईक पर सिर्फ एक व्यक्ति ही निकलता था। और चार पहिया वाहन एक दम अति आवश्यक कार्य के लिए चलाया गया। सड़कों पर वाहनों के परिचालन में कमी थी और बिना किसी जल्दीबाजी या ओवरटेक के गाड़ियां सरपट दौड़ती थी। गाड़ियों के चलने के लिए समय सारणी की भी अहम भूमिका रही। रात में किसी विशेष परिस्थितियों में ही गाड़ी की परिचालन हुआ करता था। इसी सब कारणों के वजह से सड़क दुर्घटना में बहुत कमी आई है।