
गोपालगंज। कथा मेरे ही जिले की है। किसी सत्संग(यही बता रहे हैं दोनों) में दो परिवार गए। एक परिवार में हीरो जी थे और दूसरे परिवार में हीरोइन जी! मंच से साधु महाराज मोक्ष का मार्ग बता रहे थे, इधर दो जोड़ी आंखों ने एक दूजे में जीवन का मार्ग ढूंढना शुरू कर दिया था। बुलेट ट्रेन वाले इस सुपरफास्टीय युग में मोहब्बत की गति भी तीब्र हो गयी है। अब दिलों के आदान प्रदान के लिए नयनों का लड़ जाना ही काफी है। पहले दिल के बदले में दिल देने की प्रथा थी, अब दिल के बदले में 'मोबाइ लम्मर' लिया जाता है। शामियाने के पीछे लम्मर का लेना देना हो गया। दोनों अपने अपने घर लौटे और उसी दिन से पूरे लगन के साथ मोहब्बत में डूब गए। लड़की के लिए लड़का खेसारी लाल जादो था, तो लड़के के लिए लड़की काजल राघवानी... हम तोहके दिल्ली घुमाएंगे, ताजमहल के आगे फोटो खिंचाएँगे से शुरू हुई यात्रा महीने डेढ़ महीने में ही 'मोका मिला तो हम बता देंगे, तुम्हे केतना प्यार करते हैं सनम..' से होते हुए 'हम तेरे बिन जी ना सकेंगे...' तक पहुँच गयी। इसी बीच दोनों मिलते रहे। मिलते रहे, फूल खिलते रहे... पर एक दिन धर लिए गए। फिर वही हुआ जो सिनेमा में नहीं, रियल में होता है... हीरो का हाथ पैर बांध कर पूरे गाँव ने मोहब्बत का पहाड़ा पढ़ाया। जब उसके दसों द्वार से मोहब्बत का प्रवाह होने लगा तब पुलिस को बुला कर सौंप दिया गया। पुलिस के सामने नायिका ने कहा, " आय हाय हाय! हम इस मुतपियना से काहे प्रेम करें जी? इहे हरामजादा हमारे पीछे पड़ा था..." अचरज न करिए भाई साहब! यह कोई अजूबा बात नहीं है। दर्जन भर प्रेम कहानियों को इसी मोड़ पर आकर समाप्त होते देखा है हमने। हीरो साहब गए जेल... बाद में पता चला कि केस में रेप की भी धारा भी लगी है। बेचारा नायक, छन भर में आमता बचन से गुलशन ग्रोवर हो गया। अच्छा एक मजेदार बात सुनिये। हमने कुछ अनुभवी लोगों से सुना है, जेल में जब कोई छेड़छाड़, छिनरपन का आरोपी जाता है तो बड़े अपराधी उसे बहुत जलील करते हैं। बेचारे को सबसे पैर दबाने, बर्तन धोने टाइप के काम करने पड़ते हैं। तो हीरो बेचारे मोहब्बत का फल जेल में पैर दबा कर चख रहे होंगे। इसी बीच पता चलता है कि हीरोइन माँ बनने वाली है। मां बाप की डांट डपट पर बताती हैं कि ही वाज नॉट ए रेपिस्ट! ही वाज माई बाबू सोना... हीरोइन के पिता भगते हैं हीरो के घर! कहते हैं, "समधी जी नमस्कार! अब जो हुआ सो हुआ, पर अब बियाह कर देते हैं..." लड़के के पिता की मांग है कि पहले केस तो उठा लो गुरु! पर लड़की का पिता शातिर है। वह कह रहा है, "केस उठा लें और उसके बाद लड़कवा बियाह न करे तब? पहिले बियाह उसके बाद केस उठेगा। तो भइया। एक सज्जन जज साहब की कृपा से हीरो को चार घण्टे की पेरोल मिली और मन्दिर में हुआ विवाह। हीरोइन पत्रकारों से कह रही है- आई लभ भेरी मच्च... ही इज माई बाबू...' खैर! अंत भला तो सब भला! अब जल्दी से केस उठे तो हीरो को भी जेल में पैर दबाने से मुक्ति मिले😊
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Fb wall सर्वेश तिवारी श्रीमुख
गोपालगंज, बिहार।




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