सारण :रौउजा स्थित ब्रह्म विद्यालय सह आश्रम में आयोजित हुआ सतु भंडारा, कई प्रदेशो से जूटे श्रधालुओं ने की गुरु दर्शन व प्रसाद ग्रहण
#असत्य और सत्य के बीच में खड़ा होता है गुरु, सबके लिये गुरु की पहचान भी जरूरी – स्वामी सत्यानन्द जी महाराज

छपरा (सारण)
शहर से सटे सदर प्रखंड के रौउजा के ब्रह्म विद्यालय सह आश्रम में शनिवार को संतो और स्रधालुओ का जुटान हुआ । यूपी,एमपी,झारखण्ड,बंगाल सहित कई प्रदेशों से जमा हुए स्वामी एवम स्रधालुओ ने आश्रम में आयोजित सतु के वेशेष भंडारे का प्रसाद प्राप्त किया ।

बैशाख महीने में सतु के विशेष भंडारे के आयोजन पर बताते हुए स्वामी व्याशानंद जी ने कहा कि सतु की तासीर ठंढी होती है । गर्मी के इस मौसम में सतु के सेवन से मन और शारीर दोनों को शीतलता मिलती है । वही सतु में शुद्ध और मोटे अनाजों को शामिल करने से यह वैचारिक शुद्धता भी प्रदान करता है ।

इसके पूर्व स्रधालुओ ने गुरु स्वामी सत्यानन्द जी महाराज के दर्शन किये । अपने प्रवचन में बोलते हुए स्वामी सत्यानन्द जी महाराज ने कहा कि असत्य और सत्य के बीच में गुरु खड़ा होता है I गुरु कि विशेष कृपा से लोगों को सत्य और असत्य के बीच भेद का पता चलता है । व्यक्ति किताबों से ढेर सारा ज्ञान प्राप्त करके भी सांसारिक ज्ञान से अलग ही रहता है । किताबी ज्ञान की ही तरह इस ज्ञान कि प्राप्ति के लिए भी एक योग्य गुरु कि अवाश्यकता होती रही है I सत्य और असत्य के भेद को जाने बिना कोई भी व्यक्ति मोक्ष्य को नहीं पा सकता । आत्मा और परमात्मा के बीच के अंतर को समाप्त कर व्यक्ति मात्र को भवसागर को पार करने में गुरु कि भूमिका को समाप्त नहीं किया जा सकता । सांसारिक जीवन में अध्यात्मिक ज्ञान का संचार गुरु के माध्यम से ही होता है अतः सभी के लिए अपने हेतु एक योग्य गुरु कि तलाश रखनी चाहिए । यह तलाश पूरी होने पर व्यक्ति के जीवन में तेजी से परिवर्तन का आना भी शुरू हो जाता है।भंडारा के मौके पर डॉ बीके सिंह ,शंकर सिंह , संत प्रसाद , सोनू सिंह , राधा कृष्ण गिरी , सुजीत सिंह , सुरेंद्र प्रसाद , जेपी सिंह , धनवीर सिंह , सुनील कु मिश्र , राम नरेश सिंह, राज कुमार गिरी सहित दर्जनों लोग सेवा भाव से उपस्थित थे ।


#2007 से चलता आ रहा है सतु का भंडारा-
छपरा में ब्रह्म विद्यालय सह आश्रम कि स्थापना 2005 में बताई जाती है आश्रम के निर्माण के उपरांत यहा 2005 से भंडारे का आयोजन किया जा रहा है । पुरे वर्ष में आश्रम दो बार मकर संक्रांति और बैशाख मास में भंडारे का आयोजन करता है । भंडारे की व्यवस्था में स्रधालू खुद से सक्रिय रहते है वही आश्रम भी अपनी भूमिका को पूरा करता है ।
#छपरा जिला के है संस्थापक गुरु,छपरा से है विशेष लगाव –
ब्रह्म विद्यालय सह आश्रम के संस्थापक गुरु छपरा के निवासी थे । गुरु श्री स्वामी आद्वेतानन्द जी महाराज का जन्म छपरा के सरयू नदी किनारे दहियावा में हुआ था । हालांकि बाद में स्वामी जी देश का भ्रमण करते हुए पाकिस्तान के टारी चले गए थे जहा आज भी उनकी समाधी है । गुरु का जन्म स्थान होने के कारण ब्रह्म विद्यालय सह आश्रम के संस्थापक के अन्य गुरु और स्वामी का छपरा से विशेष लगाव है ।