धर्मेंद्र रस्तोगी/छपरा, 20 अगस्त।
जिले में कालाजार उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक वैज्ञानिक और धारदार बनाने के लिए केंद्रीय कीट विज्ञान विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय टीम ने सारण का दौरा किया है। इस दौरान टीम ने जिले के तीन प्रमुख प्रभावित प्रखंडों जैसे – नगरा, गड़खा और दरियापुर के विभिन्न गांवों का सघन क्षेत्रीय भ्रमण किया है। इस संबंध में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (डीवीबीडीसीओ) डॉ भूपेंद्र कुमार ने बताया कि केंद्रीय टीम में शामिल नेशनल एंटोमोलॉजिस्ट आशीष कुमार लामियान, मलेरिया निरीक्षक राजकुमार और जुग्गुल किशोर मीणा ने चिन्हित गांवों में कालाजार के वाहक (वेक्टर) यानी बालू मक्खी की ज़मीनी स्थिति का जायजा लिया।

विशेषज्ञों ने गांवों में बालू मक्खियों के संभावित प्रजनन स्थलों और विश्राम स्थलों का बारीकी से निरीक्षण तथा तय वैज्ञानिक मानकों के अनुसार सैंड फ्लाई का कलेक्शन किया है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान संग्रहित की गई बालू मक्खियों को आगे के विस्तृत वैज्ञानिक अनुसंधान और एंटोमोलॉजिकल अध्ययन के लिए सुरक्षित रूप से भेजा गया है।

संदिग्ध प्रजनन और विश्राम स्थलों का निरीक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान से मिलेगी मजबूती:
डीवीबीडीसीओ डॉ भूपेंद्र कुमार का मानना है कि इस अध्ययन से प्रभावित क्षेत्रों में वेक्टर की उपलब्धता, घनत्व और अन्य कीट संबंधी पहलुओं की सटीक जानकारी मिल सकेगी। इससे भविष्य में कालाजार नियंत्रण की रणनीतियों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में वैज्ञानिक मदद मिलेगी। इस महत्वपूर्ण अभियान के दौरान केंद्रीय टीम को राज्य और स्थानीय स्तर पर व्यापक तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। इस संयुक्त अभियान में निम्नलिखित विशेषज्ञों और टीमों ने सक्रिय सहभागिता निभाई है। जिसमें मुख्य रूप से स्टेट एंटोमोलॉजिस्ट मोहन कुमार, जोनल एंटोमोलॉजिस्ट (मुजफ्फरपुर) नीरज कुमार सिंह और पटना के अभिषेक कुमार, आर एम आर आई एम एस पटना की टीम, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू एच ओ) के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय और पीरामल फाउंडेशन की टीम के अलावा डीवीबीडीसीओ, उक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, डीवीबीडीसी, वीडीसीओ, वीबीडीएस और इंसैक्ट कलेक्टर मौजूद रहे।