सारण के लाल अब रणजी ट्राफी मे दिखायेंगे अपनी धमाल 
▪छपरा के प्रेमरंजन ने आखिरकार अपने संघर्ष के बूते रणजी क्रिकेट टीम मे जगह बना ही लिया
छपरा (सारण)
छपरा के प्रेमरंजन पाठक ने अपने संघर्ष के बल बूते रणजी क्रिकेट टीम मे जगह बना ही लिया ।20वर्षों से संघर्ष करने वाले प्रेमरंजन पाठक मूल रुप से छपरा के रहने वाले है ,फ़िर भी अपने पिता मनीन्द्र नाथ पाठक के कर्मभूमि बेगुसराय मे ही आपनी कैरियर के लिये संघर्ष कर रहे थे ।बेगूसराय मे ही प्रेमरंजन ने शहीद भगत सिंह क्रिकेट क्लब बना कर उसकी कप्तानी सम्भाले हुये थे ।इस वर्ष हेमन ट्राफी मे 23विकेट चटाकाकर चयन कर्ताओं को आपनी ओर आकर्षित किया था ।अपने छोटे भाई के चयन पर बड़े भाई मनोरंजन पाठक ने प्रसन्नता जाहिर करते हुये उसके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाए दी ।
  प्रेमरंजन की कहानी दर्द भरी दस्तानों से भरी है ।छः भाई और दो बहनो के सबसे छोटे प्रेमरंजन की क्रिकेट की दीवानगी ऐसी थी की अपने पिता के आकस्मिक निधन से 2006 मे पूरा परिवार हिल गया था वही ऊपर से आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार का प्रेम रंजन पर नौकरी करने का भारी दबाव पर रहा था ।आखिरकार मे प्रेमरंजन ने परिवार के स्थिति को भांपकर 2008 मे अपने पिता की अनुकम्पा की नौकरी पर योगदान करना ही पड़ा ।फ़िर भी क्रिकेट की जुनून ऐसी की नौकरी करते हुये भी क्रिकेट के प्रति  दीवानगी नहीं छोड़ी और आखिरकार सफलता कदम चूम के ही रहा ।फिलहाल प्रेमरंजन बेगूसराय पुलिस बल मे पडस्थापित है ।रणजी क्रिकेट टीम के साथ वे मुम्बई के लिये ही नहीं अपनी जीवन की लम्बी उड़ान 24 अगस्त को भरेंगे ।
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साभार :मनोरंजन पाठक ,छपरा