☀आईआरएस के काम में लगे स्वास्थ्यकर्मी कर रहे फाइलेरिया के मरीजों की पहचान
☀बैनर-पोस्टर के माध्यम से इस बीमारी के प्रति लोगों को किया जा रहा है जागरूक

✍️परमार मीडिया नेटवर्क
मोतिहारी/ 3 अक्टूबर:हम जिन कदमों से सफलता की सीढ़ी चढ़ने के सपने संजोते हैं, अगर वे ही साथ ना दे तो सोच सकते हैं कितनी तकलीफ होगी। ऐसे हालात से सामना तब करना पड़ता है, जब कोई फाइलेरिया रोग से ग्रसित हो जाता है। हाथी पांव के कारण किसी की जिंदगी बदरंग ना हो, इसलिए जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यालय फाइलेरिया के मरीजों की पहचान में जुटा हुआ है। डीभीबीडीसीओ डॉ जितेंद्र प्रसाद ने बताया कि अभी जिले में कालाजार उन्मूलन के लिए आईआरएस राउंड चल रहा है। इसमें जुटे स्वास्थ्य कर्मी घर-घर छिड़काव करने जाते हैं तो
फाइलेरिया के रोगियों की पहचान के लिए सर्वे भी कर रहे हैं। अभी तक 20 फाइलेरिया के रोगियों की पहचान की गई है। डॉ जितेंद्र ने बताया कि फाइलेरिया की रोकथाम के लिए आमजन को जागरूक करने के लिए बैनर-पोस्टर लगाए गए हैं। इसमें एमडीए की गतिविधियां, फाइलेरिया से बचाव और स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी अंकित की गई है।
👉रोकथाम ही इस बीमारी का समाधान :
डॉ जितेन्द्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया की रोकथाम ही इसका समाधान है। यह मच्छरों द्वारा फैलता है, खासकर परजीवी क्यूलैक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के जरिए। जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रस्त व्यक्ति को काटता है तो वह संक्रमित हो जाता है। फिर जब यह मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के विषाणु रक्त के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी फाइलेरिया से ग्रसित कर देते हैं। आमतौर पर फाइलेरिया के कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन बुखार, बदन में खुजली, पैरों और हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) फाइलेरिया के लक्षण हैं। चूंकि इस बीमारी में हाथ और पैर हाथी के पांव जितने सूज जाते हैं इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव कहा जाता है। वैसे तो फाइलेरिया का संक्रमण बचपन में ही आ जाता है, लेकिन कई सालों तक इसके लक्षण नजर नहीं आते। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को विकलांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। हाथी पांव जैसी बीमारी से बचाव के लिए डी.ई.सी/एल्बेंडाजोल की गोली 2 वर्ष से ऊपर के बच्चों को खाना है, जिसमें एल्बेंडाजोल की गोली को चबाकर खाना है। वहीं 2 वर्ष से 5 वर्ष के बच्चों को डीईसी की एक गोली, जबकि 5 वर्ष से 14 वर्ष के लोगों को 2 गोली व उससे ऊपर उम्र के लोगों को 3 गोली खानी है। इसके साथ ही सभी लक्षित वर्ग को एल्बेंडाजोल की एक दवा चबाकर खानी है।
👉फाइलेरिया से बचाव के उपाय :
डॉ जितेंद्र प्रसाद के मुताबिक- ☆फाइलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। इसके लिए घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखें।
☆घर के आसपास पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। पूरी बाजू के कपड़े पहनकर रहें।
☆सोते समय हाथों और पैरों पर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगा लें।
☆हाथ या पैर में कहीं चोट लगी हो या घाव हो तो फिर उसे साफ रखें। साबुन से धोएं और फिर पानी सुखाकर दवाई लगा लें। सावधानी ही इस रोग से बचाव है। इसके प्रति जनजागरूकता जरूरी है।




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