मैं भारत की नारी हूँ
सविता उपाध्याय
मेरी भावना मुझे भारत देश की नारी हुँ.बेहद खुशी होती है.जब मै किसी को अपनी पहचान भारतीय नारी होने का देती हुँ .सहसा एक दिन विजय कुमार जैन जी से हमारी बार्तालाप हुयी और हमको विजय जी के द्वारा बहुत ही खास जानकारी प्राप्त हुयी ।उस छोटा सा ज्ञान और अनुभव को मै आपने शब्दो के द्वारा लिखने की कोशिश कर रही हुँ हमारे भारत देश की पहचान है अनेकता मे एकता रीतीरिवाज.सभ्यता. संस्कृति परम्पराओं परिपूर्ण है ।यहाँ एक दुसरे के प्रति भाई चारा है।जब सब कुछ हमारे पास है .फिर क्यों हम सब आज भी अंग्रेजो के गुलाम है .अंग्रेजो चले गये पर अंग्रेजी छोड़ गये .थीरे थीरे अंग्रेजी हमारे भारत देश की हिन्दी . को दीमक की तरह खोखला कर रहे है .आज जब भी कही किसी से बात करते है.हिन्दी मे जवाब मिलता है इंगलिश मे .उस समय तकलीफ होती है यह देख कर भगतसिह .सुभाष.जैसे भारत माँ के अनेक वीर सपूत आजादी के नाम पर शहीद हो गये। पर क्या हम आजाद है। आज भी हम गुलाम है क्योंकी आज से जब हम 20-25 साल आगे जायेगें तब हम देखेगें हमारे भारत देश से हिन्दी अस्तीत्व ही मिट गया होगा। हमारे बच्चे माँ को मोम.पिता को डैड बोल रहै होंगे डैड का मतलब खत्म .हम सब को यह समझना होगा .और हमारी मातृभाषा हिन्दी को बचाना होगा हमारा राष्ट्र के नाम संदेश है। हम सब मिल कर हिन्दी को सम्मान दिलाये।मातृभाषा से उसे राप्ट्रभाषा बनाये।लेकिन सबसे पहले सबकी भाषा .उर्दू.बंगाली. पंजाबी.मराठी.सिंथी. गुजराती आदी भाषाओं को मातृभाषा का सम्मान मिले हिन्दी को राष्ट्रभाषा की पहचान मिले भारत की नारी।




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