
- महाशिवरात्रि पर पौराणिक गुप्तेश्वर महादेव मंदिर से निकली शिव- बरात
- दिघवारा के रंगकर्मियों ने अदा की देव
- असुर व शिवगणों की भूमिका
- महेश स्वर्णकार बसहा बैल पर बैठ शिव शंकर नज़र आए
- अष्टयाम के बाद त्रैदशी व्रत व शिव विवाहोत्सव संपन्न
दिघवारा (सारण) महाशिवरात्रि व्रत व शिव विवाहोत्सव जलाभिषेक व भव्य बरात सहित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर पर संपन्न हुआ।शुक्रवार को पौराणिक गुप्तेश्वर महादेव मंदिर, चकनूर मुहल्ला शिवधाम बन गया ।

झझिया डगर से लेकर शिवरात्रि मेले के साथ अनुपम शिव विवाहोत्सव झांकी पूरे दिघवारा नगर में देखी गई।सुबह 6बजे से शिव भक्तों की लंबी कतारें लग गयी । दिघवारा नगर पंचायत के अलावा मानूपुर से लेकर बरूआं गांव तथा दरियापुर के खानपुर, मुजौना, सज्जनपुर मटिहान, भैरोपुर, मानपुर, शीतलपुर पट्टी तक के हजारों नर-नारी, बच्चे, बूढ़े, जवान बेलपत्र, भांग, धतूरा, बेर, कनैल व पारिजात के नीले पीले पुष्प सहित गंगा जल से भरे पात्र लिए कतारबद्ध होकर जलाभिषेक, पूजन अर्चना करते गए।

शिव भक्तों का तांता करीब दो बजे तक लगा रहा । करीब ढाई बजे मंदिर परिसर से शिव बारात की झांकी हाथी घोडे पैदल ,भैसा (कृत्रिम) सवार, बसहा बैल (कृत्रिम)पर शिव बने रंगकर्मी नगर परिक्रमा को निकले । ओझा, सोखा, भूत, बैताल बने दिघवारा के रंगकर्मियों को लोग पहचान नहीं पा रहे थे कि कौन है? हाँ गत् नौ बर्षों से शिव की भूमिका निभाने वाले महेश स्वर्णकार को लोग पहचान सके ।

शिव बारात संध्या काल में पुनः मंदिर परिसर वापस लौटी और शिव बने महेश स्वर्णकार व उनकी पत्नी उषा स्वर्णकार की वैवाहिक रश्म अदायगी हुई।उधर अंबिका स्थान, आमी, सतीतेश्वर महादेव, रामपुर-आमी, दरियापुर प्रखंड के फुर्सतपुर स्थित शिवालय, गड़खा प्रखंड के बसंतनाथ मंदिर, बसंत बाजार स्थित गरीबनाथ मंदिर सहित तमाम शिव मंदिरों में नर-नारियों ने बाबा का जलाभिषेक किया ।

शिव बरात की अनोखी झांकी निकलती है प्रति वर्ष





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