दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट:-

नरकटियागंज : प्रखंड अंतर्गत नौतनवा पंचायत के पचमवा गाँव में सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन ने चाक-चौबंद प्रबंध किया। डीएम और एसपी के साथ पूरा लाव लश्कर से मानो पचमवा छावनी में तब्दील हो गया। वहां के लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से सड़क पर लेटकर प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध किया, बावजूद इसके प्रशासन ने जेसीबी से 63 मकानों को तोड़ने का काम प्रारंभ कर दिया है। इस दौरान स्थिति पूर्णतः नियंत्रण में रही। नरकटियागंज प्रखंड प्रशासन, अंचल प्रशासन, पुलिस प्रशासन, और जिला व पुलिस प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण हटाने का काम जारी रहा। हालांकि उसमें 30 से 37 इंदिरा आवास के मकान भी पाये गए, जिन्हें जेसीबी से ध्वस्त कर जमींदोज़ कर दिया गया। चर्चा इस बात की होती रही कि आखिर अतिक्रमणकारियों को इन्दिरा आवास कैसे मिला, इसके लिए दोषी कौन? दीपावली के पूर्व 63 गरीबों का आशियाना उजाड़ा गया। उनकी दीपावली में जब घर ही नहीं रहे तो रौशनी कहाँ होगी? इस बावत प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि 30 इन्दिरा आवास बने हुए हैं। इन्दिरा आवास का निर्माण अतिक्रमण वाली भूमि पर किसने व कैसे कराया। प्रश्न यह उठता है कि अतिक्रमण वाली भूमि पर इंदिरा आवास बनाने की स्वीकृति और अनुमति किसने दी। यदि मकान बन गए तो उन्हें तोड़कर सरकारी राशि की बर्बादी कराने के दोषियों को ढूंढने की आवश्यकता है। उन्हें दण्डित करना अनिवार्य है। 33-37 मकानों के निर्माण में सरकार की जितनी राशि खर्च हुई, उसकी भरपाई कौन करेगा? अब देखना यह है कि प्रशासन आगे कौन सा कदम उठाता है। अतिक्रमण हटाने के दौरान गरीबों ने डीएम डॉ नीलेश रामचंद्र देवरे से मिलकर उन्हें वस्तु स्थिति से अवगत कराया। स्थिति को करीब से देखने के बाद डीएम का हृदय सम्भवतः पसीजा होगा, लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारियों के कारण मौन रहे, कुछ चहल कदमी के साथ उनकी भाव भंगिमाओं को बदलते देखा गया। जिससे गरीबों की आशियाना उजाड़ने के मामले में जिला पदाधिकारी अवश्य ठोस कदम उठाकर दोषियो के विरूद्ध समुचित कदम उठाएंगे।