बेतिया – गौनाहा:– *इंडो-नेपाल बॉर्डर स्थित भिखनाठोरी गांव के लोग हैं भयभीत बंद हुआ कटाव रोधी कार्य*

न्यूज इनपुट रामायण कुमार गौनाहा पं.चम्पारण बिहार :-
✍ कभी नदी के कटाव तो कभी वन विभाग के कूटनीति से है परेशान ।
✍ जिलाधिकारीके आदेश पर हो रहा कटाव निरोधी कार्य आज लगभग तीन चार रोज से वन विभाग के अडचन के कारण है बंद ।
✍ इससे पहले भी हो रही सड़क निर्माण व विद्यालय भवन निर्माण पर वन विभाग के द्वारा रोक लगा कर नही बनने दिया गया ।
*पश्चिमी चम्पारण गौनाहा* यु तो इंडो-नेपाल बॉर्डर स्थित भिखनाठोरी गांव नक्शे में तो है । लेकिन गुलामी की जंजीर देखने को मिल जाऐगा यहां ।
कहने के लिए तो ये गांव प्रयटन स्थल है लेकिन यहां के लोग कटाव जैसी सबसे बड़ी समस्या से जुझ रहे है ।
12 अगस्त को आई भीषण बाढ में ठोरी से 34 घर कटकर नदी के ग्रभ में समा गये ।
जिलाधिकारी का आगमन हुआ लोगो के चेहरे चहकने लगे क्योकी लगभग लगभग साढ़े तीन करोड की लागत से गांव व प्रयटन स्थल को कटने से बचाने के लिए बांध का निर्माण करने का आदेश साहब ने दिये ।
ठिकेदारी भी मिली समान भी उतरा थोड़ी-बहुत अडचने आयी लेकिन कटाव रोधी निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ लेकिन दो दिनो के बाद वन विभाग के अधिकारी के द्वारा हो रही निर्माण कार्य पर रोक लगा दिया गया ।
इससे पहले भी विद्यालय भवन का निर्माण कार्य पर रोक लगा कर स्थानीय बच्चो के भविष्य से खिलवाड़ किया जा चुका है ।
स्थानीय मोतीलाल पासवान, शेषनाथ यादव, पुर्व मुखिया दयानंद सहनी, पुना सिंह, धनु उरांव, दयानंद गुप्ता, वार्ड सदस्य प्रेमसीला देवी , पंच रामानंद सिंह, कमलेश ठाकुर, कृषमोहन ठाकुर पुनम देवी आदि लोगो का कहना है कि भिखनाठोरी सदियो से बसा गांव है । लेकिन सभी सुविधायें होने के बाद भी सरकार वासगित पर्चा मुहैया नही करा रही है । जिसके कारण हमलोगो को हर हमेशा परेशानीयों का सामना करना पडता है ।
सरकार के छोटे बड़े अधिकारीयों के द्वारा बोला और कहा जाता है कि ये राजस्व ग्राम नही है । लेकिन मिली जानकारी के अनुसार यहां 22 जमांबंदीयां चलती है । 1996 तक लगान व 2013 तक सरकार के द्वारा राजस्व की वसुली बजार से कि गई है ।
यही नही ब्रिटिश सरकार के जार्ज पंचम के द्वारा बनवाया गया भवन व रेलवे आज भी जीता जागता सबुत है कि राजस्व कि वसुली यहां से हुई है ।
इतना ही नही सरकार के द्वारा यहां खुफीया विभाग का स्थापना सन 1954 ,जनवितरण प्रणाली दुकान का स्थापना सन 1965, पोस्ट ऑफिस का स्थापना सन 1968, प्राथमिक विद्यालय का निर्माण सन 1972, मतदान करने के लिए बुथ का निर्माण सन1977, यात्री प्रतिछालय का निर्माण सन 1984-85, सामुदायिक भवन का निर्माण सन 1994-95, आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण सन 1999, सन 2013 तक बजार लगाकर क्या राजस्व की वसुली नही कि गई ।
सरकार के दोहरीकरण में फसी ठोरी वासी कहते है कि 2008 में जब वन में रहने वाले वनवासीयों को पर्चा दिया जाये का कानुन बना तो लगा था कि हमें जमीन का वासगित पर्चा मिलेगा । कानून भी बना तत्कालीन डीएम के द्वारा 179 लोगो को दावा पत्र ठोरी पहुंचकर दिये । फिर सुबे के मुखिया माननीय नितिश कुमार ने सन 2013-14 रामनवमी में ठोरी पहुंचकर फिर से एक बार तत्कालीन डीएम को ये आदेश दिए कि अविलंब लोगो को वासगित का पर्चा दिया जाऐ । नजरीया नक्शा भी बना लेकिन सब किताबो में सिमट कर रह गया ।
गांव-प्रयटन स्थल व वन विभाग की इस लडाई में स्थानीय लोगो को काफी दिक्कतो का सामना करना पड रहा है ।
कटाव रोधी निर्माण कार्य बंद कर दिया गया है । इससे पहले सड़क निर्माण कार्य, विद्यालय भवन निर्माण कार्य, शौचालय निर्माण कार्य व सात निश्चय योजना अंतर्गत निर्माण कार्य स्थायी रूप से वन विभाग के आदेश के बाद बंद कर दिया गया है ।