दैनिक खोज खबर/सोनपुर। विश्व विख्यात हरिहरक्षेत्र सोनपुर के प्रसिद्ध श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम् दिव्य देश नौलखा मन्दिर में 27 वां श्रीब्रह्मोत्सव सह श्रीलक्ष्मी नारायण यज्ञ के निमित्त मंगलवार को कलश यात्रा सह जल यात्रा निकाली गई। इस कलश यात्रा में सैकड़ों भक्त शामिल हुए। श्री हरिहरक्षेत्र  गजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कलश यात्रियों को रवाना किया।इस दौरान भक्तों ने कलश के साथ देवस्थानम की परिक्रमा की।भगवान श्रीगजेन्द्र मोक्ष के जय-जयकार से संपूर्ण हरिहरक्षेत्र की धरती गुंजायमान हो उठी। यह यात्रा गजेन्द्र मोक्ष मंदिर से श्रीदेवी भू देवी लक्ष्मी देवी, श्री बालाजी वेंकटेश, आलवार संतों एवं श्रीगरुड़ देव की प्रदक्षिणा व उनके आशीर्वचन प्राप्त कर बाबा हरिहरनाथ मंदिर पहुंचा और उन्हें नमन करते हुए मीना बाजार रोड, ड्रोलिया सिंदूर चौक होते हुए छत्रपति रोड होकर सिद्ध नाथ चोक होते हुए श्रीगजेन्द्र मोक्ष घाट पहुंची जहां वेदपाठी ब्राह्मणों के द्वारा मंत्रोच्चार से जल मातृका, थल मातृका, स्थल मातृका व षोडशोपचार से वरुण देव का पूजन संपन्न हुआ। पूजनोपरांत देवी नारायणी  एवं माता गंगा की आरती हुई।आरती के बाद कलशयात्रियों द्वारा विधिवत जल- हरण कार्य संपन्न हुआ।इसके बाद कलश यात्रियों ने पवित्र यज्ञमंडप की परिक्रमा की और कलश को यज्ञ शाला में स्थापित किया। श्री गजेंद्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने इस मौके पर जल यात्रा के महत्त्व पर कहा कि आध्यात्मिक जगत में किसी भी अनुष्ठान यज्ञादि करने के लिए सर्वप्रथम जल यात्रा किया जाता है। सभी कार्य जल से ही पूर्ण होते हैं। जल ही जीवन है। जल के बिना जीवन अधूरा है। संसार के सभी प्राणियों को शुद्ध करने का काम वरुण देवता करते हैं। बिना वरुण देवता का पूजन किए संसार का कोई कर्म सफल नहीं हो सकता। भगवान वामन के चरणों से गंगा निकली है इसलिए गंगा सर्वोत्तम है। इस अवसर पर रात्रि 9, बजे मृत्तिका संग्रह (मटकोर), कुदाल का पूजन हुआ। मिट्टी में अंकुररोपण किया गया। मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए।