नजदीक आते चुनाव के साथ गहराता जा रहा है महाराजगंज का महासमर, एनडीए व महागठबंधन में सीधी लड़ाई

विनीत कुमार, छपरा
बिहार का चितौड़गढ़ कहे जाने वाले महाराजगंज लोक सभा क्षेत्र में सीधी लड़ाई एनडीए व महागठबंधन के प्रत्याशियों के बीच है. एनडीए ने एक ओर जहाँ निवर्तमान सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल पर दांव लगाया है वहीं दूसरी ओर महागठबंधन ने महाराजगंज के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के पुत्र रणधीर सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है. अपने ओर से दोनों ही बड़े दलों ने काफी सोच विचारकर प्रत्याशी मैदान में उतारा है जिस कारण महाराजगंज की लड़ाई भी बिल्कुल कांटे की हो चली है. महाराजगंज लोक सभा क्षेत्र में छठे चरण के अंतर्गत 12 मई को चुनाव होगा.
1998 के बाद पहली बार महाराजगंज के महासमर में नही है प्रभुनाथ
बहुत लंबे समय तक महाराजगंज लोक सभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करनेवाले प्रभुनाथ सिंह 1998 के बाद पहली बार महाराजगंज लोक सभा के चुनावी मैदान मे नही हैं. इसलिए राष्ट्रीय जनता दल ने उनके पुत्र रणधीर को मैदान में उतारकर सिम्पैथी मतों के साथ राजपूत मतदाताओं को अपनी ओर खींचने का प्रयास किया है. पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की छवि एक बड़े राजपूत नेता के साथ साथ भोजपुरिया सांसद की भी रही है. मगर पूर्व विधायक अशोक सिंह के हत्याकांड में सजायाफ्ता होने के कारण वे महाराजगंज के रण से बाहर हैं फिर भी उनके नाम पर रणधीर सिग्रीवाल को कड़ी टक्कर देते दिख रहे हैं.
आपको बता दे कि प्रभुनाथ सिंह पहली बार महाराजगंज के सांसद सन 1998 में बने थे, तदुपरांत उन्होंने 2009 तक महाराजगंज का प्रतिनिधित्व किया. 2009 में प्रभुनाथ सिंह को उमाशंकर सिंह ने बेहद करीबी मुकाबले में मात दिया था. उमाशंकर सिंह के निधन के बाद वर्ष 2013 में हुवे उपचुनाव में प्रभुनाथ सिंह भारी मतों से जीतकर दुबारा महाराजगंज के महाराज बने थे.
2014 के मोदी लहर में भाजपा की टिकट से चुनावी मैदान में आये जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने प्रभुनाथ सिंह को 38415 मतों से पराजित कर पहली बार महाराजगंज की सीट पर भाजपा का झण्डा लहराया था.
योगी, शाह, राजनाथ, तेजस्वी आदि ने झोंकी ताकत
यूं तो हर दल के लिए एक एक सीट जीतना महत्वपूर्ण है मगर महाराजगंज की सीट का बिहार की राजनीति में खासा महत्व है तभी तो तमाम बडे नेताओ ने अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए पुरी ताकत झोंक दी है.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह, पवन सिंह, मनोज तिवारी, सुशील मोदी आदि ने जनार्दन सिंह सिग्रीवाल के पक्ष में कई चुनावी सभाएं की हैं, इनमें पवन सिंह, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व अमित शाह तो महाराजगंज में दो दो चुनावी सभाएं कर चुके हैं वही महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव ने भी रणधीर के लिए ताबड़तोड़ चुनावी सभाएं की हैं. इसके अतिरिक्त जीतन राम मांझी व उपेंद्र कुशवाहा ने भी महाराजगंज में चुनावी सभाएं की हैं.
जातिय समीकरण अब भी महाराजगंज में कारगर
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महाराजगंज के समीकरण की बात की जाय तो जातिय समीकरण यंहा अब भी बहुत कारगर है. वैसे एनडीए के प्रत्याशी जनार्दन सिंह सिग्रीवाल व उनकी टीम मोदी मैजिक व मोदी लहर के भरोसे है जबकि रणधीर सिंह का कुनबा अपने प्रभुनाथ का क्रेज व राजपूत छवि के बदौलत मे मैदान में टिके हैं. वैसे तो महाराजगंज में एनडीए व महागठबंधन के प्रत्याशी राजपूत हैं. इन दोनो के बीच सीधी टक्कर होने के कारण राजपूत मत यहाँ काफी निर्णायक साबित होंगे. वैसे भी महाराजगंज लोक सभा क्षेत्र राजपूत बहुल इलाका है, इसलिए राजपूतों की भागीदारी इस बार काफी कुछ तय करेगी.
एक नजर आंकड़ों पर :
महाराजगंज लोक सभा के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्र :
गोरेयाकोठी, महाराजगंज, एकमा, मांझी, बनियापुर व तरैया
कुल मतदाता : 1799457
महिला मतदाता : 849172
पुरुष मतदाता : 950235
थर्ड जेंडर मतदाता : 50
कुल मतदान केंद्र : 1848
विधानसभा वार आँकड़े
गोरेयाकोठी : 421 मतदान केंद्र, 318542 मतदात
महाराजगंज : 314 मतदान केंद्र,
300112 मतदात
एकमा : 297 मतदान केंद्र, 292569 मतदात
मांझी : 298 मतदान केंद्र, 289251 मतदात
बनियापुर : 321 मतदान केंद्र, 310519 मतदाता
तरैया : 297 मतदान केंद्र, 288462 मतदाता
हाल 2014 के चुनाव का :-
वर्ष 2014 मे भाजपा के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़े जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने प्रभुनाथ सिंह (राजद) को 38415 मतों से हराया था. 2014 के चुनाव में सिग्रीवाल को 3,20,753 मत प्राप्त हुवे थे जबकि प्रभुनाथ सिंह को 2,82,338 मत मिले थे. अब देखना है कि 2019 में क्या होता है और महाराजगंज में बाजी किसके नाम होती है.




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