जोगाड़ टेक्नालॉजी : अपनी साइकिल में फ्रंट , बैक लाइट और साइड इन्डीकेटर लगाकर बना दी बाइक के लूक में
⏺साइकिल में है हॉर्न भी, दो घंटे चार्ज होकर आठ घंटा चलता है बैट्री

मढ़ौरा (सारण) :
कहते है इरादे से हौसले को उड़ान मिलती है। इसे ही सच करके दिखाया है मढ़ौरा बड़ा नौतन निवासी 20 वर्षीय रामशंकर दुबे ने। छ साल पहले मैट्रिक परीक्षा पास करने पर उसके पिता ने उसे एक रेंजर साइकिल खरीद कर दी थी। तब उसके पास नया रेंजर साइकिल का होना भी बड़ा बात था लेकिन साइकिल में बाइक जैसी सुविधा का अभाव उसे खटकता था। तभी उसके दिमांग में अपनी साइकिल में भी बाइक जैसी हेड और बैक लाइट लगाने की बात सूझी। बचपन से इलेक्ट्रोनिक्स से स्वाभाविक जुड़ाव होने के कारण वह इसे पूरा करने के प्रयास में जुट गया। 2014 से पढाई के साथ साथ अपने प्रयास में जूटा रहा। अब उसने ऐसी साइकिल बना ली है जिसमे बाइक जैसी सभी लाइट की सुविधा है। रात में हेड लाइट के साथ बैक लाइट भी जलता है , लेफ्ट राइट इंडिकेटर भी काम करता है और बाइक के जैसा हॉर्न भी बजता है। यह सब कुछ उसके स्वयं का ईजाद है और इस कार्य को पूरा करने में उसके मात्र 550 रूपए ही खर्च हुए है।

▶साइकिल को बाइक जैसी बनाने की जिद थी-
रामशंकर अमनौर एचआर कॉलेज से बीए पार्ट वन का छात्र है। चार भाई में सबसे छोटा रामशंकर एक सामान्य परिवार से आता है। कृषक पिता प्रभुनाथ दुबे दो साल पहले गुजर चुके है बाकी तीन भाई खेती और मजदूरी करके ही किसी तरह परिवार का भरण पोषण करते है। रामशंकर को बचपन से इलेक्ट्रोनिक्स सामने से स्वाभाविक लगाव था। पिता ने जब उसे बाइक खरीद कर दी थी तभी से जानता था की वे बाइक खरीदने की हैसियत नहीं रखते है। उसके मन में यह कसक थी तभी उसने अपनी साइकिल में ही बाइक सुविधा लगाने की सोच ली। यह सोच इंटर में आते आते जिद में बदल गया जो आज कामयाबी के रूप में सामने है।
▶चार्जेवल इमरजेंसी लाइट के बैट्री से अपने सपने को किया साकार-
रामशंकर ने चार्जेवाल लालटेन की 4 +4 वोल्ट बैट्री से अपने सपने को साकार किया है। इस बैट्री को उसने सीट के नीचे एक चैंबर लगाकर फीट किया है। अन्य सामने में डिजिटल लाइट, हार्न, पावर कीट, बैक लाइट,रेगुलेटर,कम्प्यूटर माउस बटन चार्जिग कीट,ओवर लाइट हेलोजन और तार का उपयोग कर साइकिल को बाइक जैसी व्यवस्था में बदल दिया है। उसने सभी हैंडलिंग बटन स्विच हैंडल पर बाइक जैसे ही लगाये जो साइकिल चलते समय भी आसानी से प्रयोग किया जा सकता है।

▶मोबाइल के चार्जर से चार्ज बैट्री चलता है लगातार आठ घंटा-
यह सिस्टम रिचार्जेबल 4+4 वोल्ट बैट्री से संचालित होता है, ढ़ाई घंटा में एक बार चार्ज बैट्री से आठ घंटा लगातार लाइट जलाया जा सकता है। वही हॉर्न आदि का प्रयोग करने पर छ घंटा बैटरी चलती है। रामशंकर ने साइकिल में तार और यंत्रों को इस तरह से लगाया है जो साइकिल के लुक को प्रभावित नहीं करती। इसके हेड लाइट की रौशनी एक तीन बैट्री के टार्च से भी अधिक रौशनी देती है।
▶चार वर्षो से लगा रहा अब मिली सफलता-
इस प्रयोग को पूरा करने के लिए रामशंकर पिछले चार वर्षो से लगा है। कई अवसरों पर उसे असफलता मिली लेकिन वह हार नहीं माना और गलतियों को सुधार कर आगे सोचता रहा। रामशंकर बताता है कि कभी बैट्री फैल हुआ कभी बल्ब काम नहीं किया। स्विच से कंट्रोल में भी दिक्कते आती रही लेकिन उसे संतोष है की वह कामयाब होने में सफल रहा। उसकी इच्छा है कि कंपनी साइकिल को लाइट युक्त करे इससे लोगों रात में यात्रा करने में आसानी मिलेगी और सड़क सुरक्षा भी बढ़ेगी। रामशंकर ने यह भी कहा कि उसे मदद मिली तो वह और भी कई आविष्कार करना चाहता है।
साभार : संजीव कुमार (मढ़ौरा) , दैनिक भास्कर