मांझी(सारण) चीन से चला कोरोना वायरस ने रंगीले व सदाबहार चैत माह को नीरस बना दिया है। एक तरफ एहतियातन सरकारी व गैर सरकारी कार्यक्रमों को रद्द किये जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर भोजपुरी भाषी इलाकों में इन दिनों लोगों को झूमा देने वाले चैता के आयोजन पर भी ग्रहण लग गया है। पूरे चैत्र माह तक चलने वाले कर्ण-प्रिय चैता गीतों के कार्यक्रम को स्थगित किये जाने से गायक समेत श्रोता गण भी बेहद मायुस दिख रहे हैं। मालूम हो कि देहाती क्षेत्र का एक बड़ा तबका रात में चैता गीत सुनने पांच से दस किमी तक चला जाता है। संगीत की इस महत्वपूर्ण विधा से वंचित श्रोता कोरोना नामक वायरस को कोस रहे हैं। कई गायक कलाकारों ने बताया कि चैत के महीने में उनके साथ साथ लगभग एक दर्जन साजिन्दों को अच्छी आमदनी हो जाती थी। जिससे वे साल भर के लिए अपने परिवार के भरण पोषण का अनाज आदि की व्यवस्था कर लेते थे। सरकार द्वारा भीड़ इकट्ठा करने पर रोक लगा दिये जाने से क्षेत्र में पूर्व नियोजित तमाम सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों को रद्द किया जा रहा है। हालांकि कोरोना के प्रकोप से बचाव के लिए यह कदम ठीक हीं है। फिलहाल इस माह में अति व्यस्त रहने वाले गायक मंडलियों, कथा- प्रवाचकों, प्रवचन-कर्ताओं की पूछ घट गई है। वहीं कोरोना के डर ने अन्य व्यवसायों समेत आम जन-जीवन को भी काफी प्रभावित किया है।