कल्पना मैडम, आप लाख छटपटा लें शारदा सिन्हा और भरत शर्मा जैसे “भिखारियों” की मकबूलियत और स्वीकार्यता देखकर । लोग आपमें “मुकुंदी भाँड़” ही देखेंगे
✍संजय सिंह 
💢भिखारी ठाकुर का जमाना था । लोग बाई के झोंक में उनकी तरफ भागते थे । गाने बजाने वाले लोगों के लिए साक्षात भगवान थे । कुछ लोग जलते भी थे । उनका मानना था कि वे “भिखरिया” से ज्यादा टैलेंटेड हैं । कुछ लोग मैदान में कूद पड़े । इन्हीं में से एक थे मुकुंदी भाँड़ । नाच पार्टी बनाये । कोई पूछनिहार नहीं था । औकात पता चल गयी । बंदे ने लोकप्रिय होने का दूसरा रास्ता निकाला । बंगाल की गणिकाओं को नचवाया । लाबार से लाबारी की जगह भड़ैती करवाया । कुछ लोग मुंह पर गमछा बांधकर जाने लगे देखने । सांस में सांस आयी बेचारे के । हिम्मत बढ़ी । किसी कीमत पर भिखारी को टक्कर देना था । जमकर नंगापन परोसने लगा । दो चार जगह फजीहत झेल गया । गालियां सुनीं । लोगों ने लठ लेकर दौड़ाया । अकल ठिकाने आई । भिखारी जैसी इज्जत की लालसा भी उत्पन्न हुई । बाकायदा ऐलान कर दिया कि “मुकुंदी भाँड़ सुधर गया है ।” 
पब्लिक तो सब जानती है । देखती है कि ऐलान करनेवाला कौन है । शास्त्री जी के ऐलान पर सारा देश एक वक्त का खाना छोड़ देता है हमारे यहां । अटल जी के ऐलान पर बरसात की टीप टीप में भी विजय दिवस के दिन छत की मोमबत्तियां नहीं बुझने देता हमारा देश । अब छुटभैये भी भरम पाल कर ऐलान करने लगें तो क्या होगा ?  कुछ लोग कहकहे लगाएंगे । कुछ लोग गालियां देंगे । हां ! छुटभैयों के साथ मुंह में गमछा बाँधकर लार टपकाने वाले जय जयकार जरूर करेंगे । स्वाभाविक भी है । यहीं तो जिंदगी भर की कमाई होती है उनकी ।
मुकुंदी के साथ भी यही हुआ । भिखारी बनने के चक्कर में गालियां भी मिली । कहकहे भी लगे । हमेशा मुंह बांधकर लार टपकाने वाले भी साथ छोड़ दिये । बदले मुकुंदी का स्वाद उन्हें अच्छा नहीं लग रहा था ।
यहीं रीत है मैडम ! आपने तो भिखारी ठाकुर पर रिसर्च किया है । ये अध्याय आप से अछूता कैसे रह गया ? आप लाख छटपटा लें शारदा सिन्हा और भरत शर्मा जैसे “भिखारियों” की मकबूलियत और स्वीकार्यता देखकर । लोग आपमें “मुकुंदी भाँड़” ही देखेंगे । और हाँ ! आपकी नियति भी वहीं होगी जो उनकी हुई थी । 
वाल्मीकि और अंगुलीमाल का भी उदाहरण है हमारे यहां । लेकिन इनलोगों ने राम और बुद्ध को रचने का ऐलान थोड़े किया था ? काम किया था । काम कीजिये आप भी । बिना हड़बड़ाहट और बेचैनी के । निष्काम कर्म । वह ऊंचाई भी पा सकती हैं, जहां जाकर चोर भी महर्षि कहलाने लगते हैं ।  नहीं तो कहकहे और गालियां  मिलेंगी ही,  आपकी “जिंदगी भर की कमाई” मुंह बांधकर लार टपकाने वाले भी साथ छोड़ जाएंगे । अन्यथा मत लीजियेगा । जय जय ।
( इनपुट : श्रीनारद फाउंडेशन : सीवान )