Θ बेतिया – पण्डित योगेंद्रश्रण उपाध्याय के श्राद्धकर्म में लोगों का जनसैलाब ।

✍न्यूज इनपुट नीरज ठाकुर बेतिया (प.च) बिहार 👉
साठी प० स्पारण ।
किसी भी धर्म में मनुष्य के देहांत के उपरान्त उसका श्राद्ध कर्म उसके परिवारजनों द्वारा किया जाने वाला एक श्रद्धा है जिस के करने से यह भावना की जाती है की मृत्यु प्राणी का अगला जीवन अच्छा हो । इस में मृतक के परिवार धर्मिक अनुसार विधि विधानों को अपनाकर इस श्राद्ध जैसे कर्म को श्रद्धा के साथ संपन्न करते हैं ।
विदित हो कि गत 1 नवम्बर को श्री योगेंद्रश्रण उपाध्याय का निधन उनके पैतृक निवास साठी ,पांडे टोला में
हो गया था। उनके दाह संस्कार में भी हज़ारों का जनसैलाब गवाह बना था ,और आज उनके श्राद्ध कार्यक्रम में वैसे ही लोगों का जमवाड़ा था । नेपाली बाबा के पिता पण्डित योगेंद्रश्रण जी क्षेत्र के गणमान्य एवं समाजिक पृरुष में गिने जाने वाले ऐसे व्यक्ति थे जिनकी छवि केवल पांड्या समाज या सनातन धर्मियों तक नही थी बल्कि वह अन्य धर्मों में भी लोकप्रिय थे । जिसका प्रमाण आज क्षेत्र के कई मुस्लिम बुद्धजीवियों एवं समाजसेवियों को शामिल होते देखा गया ।जिन्हों ने पण्डित जी को श्रधांजलि दी । और उनके परिवारजनों को सन्तावना देकर लौटे ।
लन्दन में रह रहे श्री अभय कुमार , कुशीनगर हाटा के प्रसिद्ध ट्रांसपोर्टर दर्जनों बसों के मालिक श्री सत्रुवर्धन उपाध्याय उर्फ़ मोछु बाबा । सारांश एजुकेशन फाउंडेशन के प्रबन्धक शहाबुद्दीन वही युवा लेखक एवं साहित्यकार शमीम कमर रेयाज़ी सहितराजनेतिक ,प्रशासनिक अधिकारीयों एवं व्यक्तियों की भीड़ थी ।
श्री शैलेश उपाध्याय नेपाली बाबा ,राजीव उपाध्याय ,शैलेन्द्र उपाध्याय ,मनीष ,शशिभूषण ,राहुल, साहिल ,गोविन्द जी एवं पूरा उपाध्याय परिवार ने पण्डित योगेंद्रश्रण जी के इस श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल लोगों को धन्यवाद दिया । वही पण्डित जी के पुत्र श्री नेपाली बाबा ने कहा की मेरे पिता अपने कर्म से अम्र होगये और हम सभी भाई उनके पुत्र होने का कर्तव्य निभा रहे हैं । जो एक पुत्र का अपने पिता के लिए फ़र्ज़ बनता है । श्री नेपाली बाबा ने कहा की पिता का साया पुत्र के सर से उठ जाना ऐसा है जैसे बिना छत का घर , आज मन बहुत दुखद है और इसका दर्द हमेशा महसूस होगा । एक ऐसा हानी,क्षति जिसकी पूर्ति इस जन्म में संभव नहीं । भगवान से प्रार्थना है की मेरे पिता के आत्मा को शान्ति मिले ।