बुरहान शहीद बाबा के आस्ताने पर हुई शानदार कव्वाली
-मेरे नबी को भी हिन्दोस्तान प्यारा था
ए.के.केशकर ( Edited by आज़ाद नेब )
हथगाम/फ़तेहपुर,26 मई। बुरहान शहीद बाबा के आस्ताने पर आयोजित 153 वें उर्स मुबारक के मौके पर कौव्वाली का शानदार मुकाबला हुआ।हम्द,नात,मनकबत,वाकिया के साथ ग़ज़ल ने भी लोगों को खूब आनंदित किया।हजारों नर-नारियों ने जियारत की और मजार पर चादरपोशी कर मन्नतें मांगी गईं।आस्ताने को दुल्हन की तरह सजाया गया था।
          आयोजक मोहम्मद शफीक,इंकसारुल हसन,मोहसिन हसन,अनवार कुरैशी आदि ने कौव्वाल और कौव्वाला को फूल भेंटकर स्वागत किया।कौव्वाली का आगाज कानपुर के मशहूर कौव्वाल चांद अनवर ने हम्द यानी ईश्वर की स्तुति से की।तेरी रहमत से ख़ुदा शामो-सहर होती है। दिल दिया है सुरूर भी दे दे,आंख दी है तो नूर भी दे दे।नाते रसूल के अशआर पेश किये गए।पहले तो आपकी कमली से जुज्दान की खुशबू आती है, कमली जो हटा लो चेहरे से,कुरआन की खुशबू आती है।कमली वाले की ये शान,दोनों आलम के सुल्तान।तू ही फूलों में कलियों में मौजूद है, अनस तेरा नजरों में मौजूद है, तू बहारों की आंखों में मौजूद है, तू हवाओं की आंखों में मौजूद है।
              चांद अनवर ने ग़ज़ल के दौर में मोहतरमा को लाजवाब करने की कोशिश की।ग़ज़ल के पहले मुनव्वर राना, जौहर कानपुरी,उस्ताद शाइर नाजिश कानपुरी आदि शाइरों के क़तआत सुनाकर सामइन को लुत्फ़ अंदोज किया।न छेड़ो वक़्त से पहले कली को फूल बनने दो,इसे लेने दो अंगड़ाई,जरा खुलकर मचलने दो।प्यार की हथेली में कारोबार किसका है, खूब जानता हूं दिल में प्यार किसका है।
           चांद ने हिंदुस्तान की अजमत में भी कई शेर पढ़े और भारत की एकता,भाईचारे और अम्न के कलाम पेश कर मुहब्बत का पैगाम दिया।।मेरे नबी को भी हिन्दोस्तान प्यारा था।छत पे तिरंगा रहने दो।खुशबू वफ़ा की आती है हिन्दोस्तान से।उन्होंने मुस्तफा का वाकिया पेश किया तो मनकबत में ख्वाजा गरीब नवाज की अजमत बयान की।
             हिन्दू से मुस्लिम मजहब में दाखिल हुईं जौनपुर की कौव्वाला फ़िरदौस जहां जौनपुरी ने हम्द,नात,मनकबत के साथ ग़ज़ल पेश कर लोगों का दिल जीत लिया।कोई इनसां किसी इंसान को क्या देता है, आदमी सिर्फ बहाना है, ख़ुदा देता है।ऐसी फिजा बनाओ मेरे देश वासियों, हिन्दू का घर जले तो मुसलमान रो पड़े।जिसको भी देखती हूं दिवाना है नबी का,बच्चों के लबों पर भी तराना है नबी का।
             जश्न कैसा छठी का मनाया गया,हर वली औलिया को बुलाया गया,मेरे ख्वाजा को दूल्हा बनाया गया नज़्म ने धूम मचा दी।ग़ज़ल सुनाकर भी फिरदौस ने खूब वाहवाही बटोरी।दामन को आंसुओं से भिगोया न कीजिए,इतना किसी की याद में रोया न कीजिए,जन्नत मिलेगी तुमको यकीनन ये शर्त है, भूले से माँ का दिल कभी तोड़ा न कीजिए।माँ की अजमत को बयान करने वाले कई कलाम पेश किये गए।
             उर्स के मौके पर,शकील अहमद,रईस बाबू,फरीद अहमद,जहूर अहमद, हाजी सरवर गैधुआ,रमजान अली,अनीस राइन, मुन्ना राइन, चुन्ना सभासद,मुन्ना कुरैशी,अनवार कुरैशी,मोती सभासद,नबी बहेरा,अनीस सभासद,अनवार मुल्ला,रईस बिजली,राजेश यादव,शायर शिव शरण बंधु, नफीस कुरैशी,अफसर सभासद सहित अनेक लोगों ने सहयोग किया।मोईनुद्दीन मुन्ना कानपुरी ने निज़ामत की।कौव्वाली में आगामी निकाय चुनाव का भी खूब प्रचार हुआ।