सोनपुर। सोनपुर अनुमंडल कार्यालय स्थित ई-किसान भवन, में प्रखंड स्तरीय वासंतिक रबी कार्यशाला का आयोजन बुधवार को किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को रबी फसलों की वैज्ञानिक खेती, जैविक खेती, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा कीटनाशकों और उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में कृषि विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ महिला एवं पुरुष प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), मांझी, सारण के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. रविन्द्र कुमार तिवारी तथा उद्यान विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र चन्द्र चंदोला की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनके साथ प्रखंड तकनीकी प्रबंधक कनकलता कुमारी, सहायक तकनीकी प्रबंधक रवीवाला सोनी, आत्मा अध्यक्ष जनार्दन प्रसाद सिंह, कृषि समन्वयक रामजीत पंडित कुमार शौरभ सहित किसान सलाहकार धीरज कुमार, मनोहर, सुभाष कुमार, रंजीत पासवान और बंटी रजक, श्रवण उपस्थित रहे। कार्यशाला में क्षेत्र के प्रगतिशील महिला एवं पुरुष किसानों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
    कार्यशाला के दौरान किसानों को रबी मौसम में गेहूं, दलहन, तिलहन एवं अन्य फसलों की बेहतर पैदावार प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने की जानकारी दी गई। किसानों को मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने, संतुलित मात्रा में खाद देने तथा अनावश्यक रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से बचने के लिए प्रेरित किया गया। किसानों को जैविक खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट तथा उपलब्ध जैविक संसाधनों के उपयोग की जानकारी दी गई। बताया गया कि जैविक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, कृषि लागत को नियंत्रित करने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।किसानों को सलाह दी गई कि वे कीट एवं रोग की सही पहचान करने के बाद ही अनुशंसित दवाओं का निर्धारित मात्रा में प्रयोग करें।
     कीटनाशकों के छिड़काव के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करें तथा अनावश्यक रासायनिक दवाओं के उपयोग से बचें। उर्वरकों (फर्टिलाइजर) का प्रयोग भी मिट्टी की स्थिति और फसल की आवश्यकता के अनुसार करने की जानकारी दी गई।कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक, टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों से जोड़ना तथा रबी फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार के लिए जागरूकता बढ़ाना रहा।