नवोदित युवा कवि व पिरामल फाउंडेशन के गांधी फेलो  अंकित राज की रचना ”  युवा खुन ”
युवा खुन
हाँ मैं निर्भर हुँ प्रकृति पर, इंसान और भावनाओं पर,
पर मेरे शरीर में भी खुन के दौरे सतत हैं।
मैं स्वयं में एक व्यवस्था हुँ, सबसे अलग,

पर हर एक श्वास अतित के संदर्भ से मिलति है।
पर इनका अर्थ यह नही कि मैं गुलाम हुँ अतीत का,
इनका अर्थ यह भी नहीं कि मैं स्वयंभु हुँ वर्तमान में,
बोझों से मुक्ति पा, स्वयं को हर क्षण संभालना होगा,
कदम बढाकर चलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा।
✍ अंकित राज,गाँधी फेलो, पिरामल फाउंडेशन, सुरत  ( गुजरात )