चिकित्सक ने बताया मृत श्मशान गए तो जीवित निकली बालिका चिकित्सक को करे निलम्बित की परिजनों ने मांग
जिला अस्पताल की सुधरे दशा- अंचल राठौर
भुरे खाॅ
बून्दी 4 अप्रैल। एक बालिका चिकित्सालय में चिकित्सक ने मृत घोषित की जब परिजन शमशान लेकर गए तो जिन्दा हुई बालिका को देख समाज के चित परिचित लोग उसे लेकर इलाज के लिए अस्पताल लाये ये मामला है छोटी काशी बून्दी हाडारानी की बून्दी नगरी का जहाँ के “ए” श्रेणी जनाना अस्पताल के चिकित्सकों ने एक गर्भवती महिला के लड़की पैदा हुई उसे भी मृत बता दिया गया महिला जिसके लड़की हुई ये सुन बेहाल हो गई उसके परिजन अस्पताल पहुँचकर उसको श्मशान ले गए जहाँ समाज और चित परिचत सेकड़ों लोग यह सुन भी पहुँचे मगर वहाँ श्मशान में बालिका के हलचल शुरू हुई उसे जीवित देख सब की आँखे नम हो गई ख़ुशी के आँसू उसके पिता बबलू राठौर के झलक पड़े तभी एक आवाज आई ‘जाकेँ राखों साइयां मार सके न कोई’ सभी उसको लेकर अस्पताल पहुँचे और बालिका को उसकी माता के पास इलाज को लेकर अस्पताल लाये।
भाजपा मीडिया प्रकोष्ठ बून्दी जिला संयोजक अंचल राठौर ने बताया की ऐसे चिकित्सक को सस्पेंड किया जाए जिसके कृत्य से परिजन समाज व चित परिचित को मानसिक सन्ताप झेलना पड़ा। जिला प्रशासन व जन प्रतिनिधियों, मन्त्री तक बून्दी की जनता आवाज उठा चुकी है कि जिला मुख्यालय के इस सबसे बड़े अस्पताल को कुछ चिकत्सकों ने अपनी कमाई का जरिया बना रखा है जो उनकी भेट चढ़ाता उनका जच्चा बच्चा सुरक्षित बाकि उनके लिए बेगार है।
राठौर ने बताया कि यही हाल आईसीयू का है गंभीर रोगी जब इलाज के लिए आउटडोर में आता है उसे पहले तो उस सम्बंधित डॉक्टर को कॉल कर बुलाया जाता है उस डॉक्टर के आने पर ऐसे मरीज को आईसीयू में भर्ती के आदेश दिए जाते है तब परिजन स्ट्रेक्चर में उसे लेकर 1000 कदम दूर आईसीयू वार्ड में लेकर जाते तब तक या तो उसकी जान चली जाती है या इलाज पर आधा घण्टा लग जाता है और अगर मरीज के साथ उसके सगा सम्बन्धी मिलाकर 10 जने आउटडोर के पास दिखाई दिए तो चिकित्सक का यही जवाब की इसे कोटा ले जाओं यह शब्द आम तोर पर सुनाई पड़ते है। ये घटना आम है अगर आईसीयू भी ट्रॉमा वार्ड के पास जहाँ पर्चियाँ कटवाते है उसके पास नर्सिंग स्टाफ भवन (हाल केन्टीन) के सामने खाली पड़े भूखण्ड पर आईसीयू का नया भवन बन जाए ताकि अस्पताल में प्रवेश होते ही गम्भीर रोगी को तत्काल आईसीयू में भर्ती कर उसकी जान बचाई जा सके। अब तक गम्भीर रोगी जो आईसीयू तक नही पहुँच पाये उनकी साल भर में 40 से 45 है कई ऐसे गरीब की तो गिनती भी नही। जिला अस्पताल आरएमआरऐस के अध्यक्ष जिला कलेक्टर है मगर उनका भी इस और ध्यान नही यही हाल जन प्रतिनिथियों का है। बाकी अस्पताल का निरीक्षण कर फ़ोटो खिंचवा कर अपनी कटिंग जयपुर भेज वाही वाही पूरी कर लेते है।
अंचल राठौर ने बताया कि नए जच्चा बच्चा अस्पताल के दरवाजे खिड़कियों आदि को अस्पताल परिसर से चोर चोरी कर ले गए उनका भी अब तक पता नही। ए श्रेणी अस्पताल में खामियां गिनाने बेठे तो हजार है मगर बड़ी समस्या जनाना अस्पताल की चिकित्सकों की लापरवाही और भ्रष्टाचार का गर्भवती महिला को डिलेवरी से पूर्व 2500 रूपये तक पहले देने पड़ते है तब होती है डिलेवरी। ऐसी चिकित्सकों पर कार्यवाही हो। दूसरा आईसीयू का 1000 कदम की दुरी की जगह ट्रॉमा वार्ड के पास ही आईसीयू बन जाए तो गम्भीर रोगी का इलाज समय पर हो जाएगा। अंचल राठौर ने जिला अस्पताल की समस्या को लेकर कोटा-बून्दी सांसद ओम बिरला को पत्र प्रेषित किया।




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