✍रांची खेलगांव से नवीन सिंह परमार की रिपोर्ट 

💢रांची  ( 27 सितंबर ) लोकमंथन कार्यक्रम के प्रथम सत्र में  बीज वक्तव्य प्रस्तुत  करते हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष  हृदय नारायण दीक्षित  जी को  अपने संबोधन में कहा कि भारत बोध भारत की आत्मा को देखने का समग्र दृष्टिकोण है, अपनी दृष्टि को व्यापक रूप में देखने के बाद हम अपनी समृद्ध विरासत और उससे जुड़े तथ्यों को समग्र रूप में देखते हैं तो वह भारत बोध को प्रतिरूपित करता है।
इसके उपरांत प्रोफेसर रामेश्वर मिश्रा ने आचार्य धर्मपाल जी के जीवन और कृतित्व पर अपने विचारों को साझा करते हुए श्रोताओं को उनके जीवन आदर्शो से परिचित करवाया। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन्हें अक्षर ज्ञान नहीं होता है उन्हें अनपढ़ कहा जाता है परंतु भारत के गांवों में अक्षर ज्ञान से अनभिज्ञ बहुत सारे ज्ञानी हैं जिन्हें विभिन्न विषयों का  गूढ़ ज्ञान प्राप्त है। कबीर इसके उदाहरण हैं। 18वीं सदी के ब्रिटिश अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि भारत के हर एक गांव में एक विद्यालय है, बड़े गांव में एक से अधिक विद्यालय है और शहरों में ज्यादा संख्या में विद्यालय हैं प्रत्येक विद्यालय में हर एक जाति के लोग पढ़ते हैं और हर एक जाति के अध्यापक पढ़ाते भी हैं परंतु फालतू में आत्म गौरव की भावना जागृत ना हो इसके लिए इसे दबा दिया गया। किसी भी देश का इतिहास उसके आंतरिक साक्ष्यों के आधार पर लिखा जाना चाहिए परंतु भारत में छात्रों को ऐसा इतिहास पढ़ाया जाता है जो पाश्चात्य चिंतको के मतों के आधार पर निर्मित किया गया है।
तत्पश्चात तृतीय वक्ता के रूप में आशीष कुमार गुप्ता जी ने श्री रविंद्र गुरुजी और चतुर्थ वक्ता के रूप में श्री प्रशांत पोले ने अमृतलाल वेगड़ के जीवन के विभिन्न पक्षों और उनकी स्मृतियों को सभा के समक्ष उद्घाटित किया।
[ 🔴इनपुट : परमार डाॅट काॅम – सीवान ]