हुनरबाजो ने डाला डेरा,घर गृहस्थी  के औजार बना-बेच कर रहे है कमाई

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मनोकामना सिंह की रिपोर्ट 

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मढौरा (सारण)

सारण जिला के मढौरा का अतीत कल कारखाने के लिये राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात था ।कलांतर मे प्रस्थितिया बदली और एक के बाद एक करके चारो फैक्ट्रियां बंद हो गई ।लगभग एक पखवारा पुर्व मढौरा के इन्ही खंडहर बन चुके कारखानों के खाली पड़े जमीन मे मेन रोड के किनारे दर्जनों हुनरमंद परिवार डेरा डाले हुवे है ।ये हुनरबाज युवा बुढ़े केवल पुरुष ही नहीं महिलाएँ भी है ।इनके हथौरे की आवाज़ सारण इंजीनीरिंग मिल की बड़े हथौरे  जैसे जोड़ से तो नहीं लेकिन धीरे से ही सही पुराने दिनो की याद दिला रहे है ।मिल परिसर मे मध्यप्रदेश से मढौरा मे दर्जनों परिवारों ने आकर घर , खेती गृहस्थी एवं कारीगरों के  औजार बना कर अच्छी खासी कमाई कर रहे है ।यहाँ पर ये सुबह मे अपनी भाथी जलाकर लोहे की पिटाई एवं बनाई शुरू कर दे रहे है ।विशेष वात येहै की महिलाएँ भी बराबर की भागीदारी कर रही है ।ये भी गर्म लोहे को पीटकर काम के हिसाब से औजार बना ले रही है ।सुबह से नगर एवं आसपास के लोग अपने मनपसंद के हथियार एवं औजार मोल भाव करके बनवा ले रहे है ।इससे एक स्थानीय कारीगर का कहना था की हमलोगों का व्यवसाय इन लोगो के आने से प्रभावित हो गया है ।जबकि स्थानीय लोग सही उपयोगी समान सुलभ तरीके से मिल जाने से खुश दिखे ।मध्यप्रदेश के दमोय जिले के तेन्डुखेडा तहसील के तेजगढ गांव के धारु लोहघरिया ने बताया की हम हजारो परिवार बिहार एवं उरिसा राज्य के कइ हिस्सों मे तीन चार माह एसही अपना व्यापर कर तीस से चालीस हजार की कमाई कर वापस लौट फ़िर मध्यप्रदेश चले जायेंगे ।इनके साथ इनकी पत्नी भूरि बाई ,बेटा रमू लोहरीया एवं छोटे बच्चे भी आये है ।बंजारा जैसे रहन सहन मे दिखने वाले एसही दर्जनों परिवार झोपड़ि तान अपनी व्यवसाय कर रहे है ।