सहोदरा:-श्री रामनवमी और सहोदरा देवी शक्ति पीठ मंदिर । 
✍दैनिक खोज खबर संवाददाता शमीम कमर रेयाजी के कलम से 👉 हिंदु धर्म शास्त्रों के अनुसार राम नवमी के दिन को भगवान श्री राम जी का जन्म  का होना लिखा हुवा हौं अतः  पुरे देश में इस  शुभ तिथि को भक्त लोग रामनवमी के रुप में मनाते हैं। यह पर्व भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। श्रद्धा और आस्था के इस महापर्व के लिए पश्चमी चंपारण का सहोदरा देवी शक्ति पीठ मन्दिर पुरे उत्तर बिहार एवं नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में मशहूर है । 
सुभद्रा के इस मंदिर में आज हज़ारों की जनसंख्या में श्राधालू उपस्तिथ हुए और पूजा अर्चना की , मन्दिर को पुरे बिहार में एक इतिहासिक स्थल होने का गौरव प्राप्त है । यह स्थल भारत नेपाल सीमा नरकटियागंज से तकरीबन 30 की.मी उत्तर जमुनिया के निकट है। यह थरुहट का इलाका है जो थारू समाज के लोगों का गढ़ माना जाता है । इस स्थान पे श्रद्धालु केवल बिहार ही नहीं नेपाल से हज़ारों की जनसंख्या में आते हैं , यहाँ लोगों का मानना है सुभद्रा के इस देवी मंदिर में पूजा अर्चना से सभी मनोकामना पूर्ण होती है , वैसे रामनवमी के इस महापर्व के अवसर पे अक्सर लोग अपने ब्यवसायिक कामों की सुरुआत भी करते हैं जो राम नवमी के दिन शुभ और फलदायी होता है । 
इस दिन श्रद्धालु पूण्य के भागीदारी में कोई कसर छोड़ना नहीं चाहते ,इस दिन को राम जयंती के रूप में भी लोग जानते हैं इस चैत्र मास में चल रहे नौ दिनों का नौरात्र का समापन आज के दिन होता है  , हिंदुओं में विष्णु को भगवान का सातवां अवतार माना जाता है ,स्वामी तुलसीदास ने अपनी रचना राम चरित्र मानस में भगवान राम के जीवन का वर्णन करते हुए लिखा है कि भगवान  राम ने पुरुष चरित्र को चरितार्थ किया था , इन्होने अपने कर्म और धर्म को जीवन का आधार बनाया था।
 भगवान विष्णु ने राम का रूप धार कर धरती वासियों को सदमार्ग दिखाया था . और इसी कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी कहा जाता हैं.भगवान राम का संपूर्ण जीवन ही लोक कल्याण को समर्पित रहा है । उनकी कथा को सुन भक्तगण भाव विभोर हो जाते हैं व प्रभू के भजन अर्चना करते हुए रामनवमी का पर्व मनाते हैं। भगवान श्री राम का जन्म धरती पर राक्षसो के संहार के लिये हुआ था। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार वह काल जिसे त्रेता युग कहा जाता है उसी युग में रावण और उसके सहयोगी राक्षसों के संहार एवम खात्मा के लिए भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम के रुप में अवतरित हुये थे । आज आवश्यक्ता है भगवान श्री राम के बताए हुए बातों को अपनी जीवन में बसाने की धर्म में आस्था रखते हुए अपने कर्म से समाज को नई दिशा देने की प्रयास की जाए । और इस श्री रामनवमी के दिन जीवन में सुख समृद्धि की प्रार्थना की जाये ।