शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं- नीरज कुमार

नीरज कुमार

मढ़ौरा (सारण)।शिक्षक दिवस केवल ज्ञान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने का दिन नहीं है, बल्कि यह उन सभी व्यक्तित्वों को याद करने का अवसर भी है, जिन्होंने हमारे विचारों, हमारी दृष्टि और हमारी राजनीतिक समझ को आकार दिया।

जीवन की शुरुआत माता-पिता से होती है। वे हमारे प्रथम शिक्षक होते हैं। चलना, बोलना, व्यवहार करना, संस्कार और जीवन के मूल्यों को आत्मसात करना—इन सबकी पहली शिक्षा हमें माता-पिता से ही मिलती है। इसलिए शिक्षक दिवस के अवसर पर सबसे पहले मैं अपने माता-पिता को नमन करता हूँ।

मेरे जीवन में अनेक शिक्षकों और मार्गदर्शकों का योगदान रहा है, लेकिन जिन व्यक्तित्वों ने मेरी राजनीतिक सोच को गहराई से प्रभावित किया, उनमें सबसे पहला नाम डॉ. प्रेम सिंह जी (प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय) का है।

डॉ. प्रेम सिंह जी ने मुझे सिखाया कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने की सीढ़ी नहीं, बल्कि विचारों और सिद्धांतों की लड़ाई है। विचारधारा के लिए संघर्ष केवल भाषण देने से नहीं होता, बल्कि उसे पढ़ना, समझना, आत्मसात करना और अपने जीवन में उतारना पड़ता है। उनके मार्गदर्शन में मैंने डॉ. राममनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और डॉ. भीमराव अंबेडकर को गंभीरता से पढ़ा। लोहिया के समाजवाद, जेपी के आंदोलन और संपूर्ण क्रांति, आचार्य नरेंद्र देव के वैचारिक संघर्ष तथा डॉ. अंबेडकर के सामाजिक न्याय के विचारों को समझना मेरे राजनीतिक जीवन की बुनियाद बना।

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मेरे जीवन के अन्य महत्वपूर्ण मार्गदर्शकों में जस्टिस राजेंद्र सच्चर (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली हाई कोर्ट), भाई वैद्य (पूर्व गृह मंत्री, महाराष्ट्र) और वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का विशेष स्थान है। इन सभी व्यक्तित्वों ने मुझे यह समझने में मदद की कि राजनीति केवल चुनाव जीतने और सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं है। राजनीति समाज के प्रत्येक नागरिक के अधिकारों, सम्मान और न्याय की रक्षा का माध्यम है।

सच्चर साहब, भाई वैद्य और कुलदीप नैयर जी अपने जीवन के अंतिम दौर तक सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दों पर सक्रिय रहे। मानवाधिकारों से जुड़े प्रश्न हों या लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े कठिन विषय—वे हर मुद्दे को गंभीरता से पढ़ते, समझते और अपनी स्पष्ट राय रखते थे। उनके साथ समय बिताने और उनसे सीखने का अवसर मेरे लिए जीवन का बड़ा सौभाग्य रहा।

आज की राजनीति में विचारधारा और सिद्धांतों को अक्सर सुविधानुसार पीछे छोड़ दिया जाता है। लेकिन इतिहास गवाह है कि विचारधारा से विहीन राजनीति अंततः केवल सत्ता का खेल बनकर रह जाती है। मेरे शिक्षकों और मार्गदर्शकों ने मुझे यही सिखाया कि राजनीति में आने से पहले राजनीति को पढ़ो, समझो और उसके मूल उद्देश्यों को आत्मसात करो। समाज के सबसे कमजोर, वंचित और हाशिए पर खड़े लोगों के अधिकारों की लड़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाओ।

डॉ. प्रेम सिंह जी, जस्टिस राजेंद्र सच्चर साहब, भाई वैद्य और कुलदीप नैयर जी मेरे जीवन के ऐसे मार्गदर्शक हैं, जिन्होंने मुझे राजनीति को सत्ता के बजाय समाज परिवर्तन के नजरिए से देखने की दृष्टि दी। दिल्ली विश्वविद्यालय ने मुझे बहुत कुछ दिया। शिक्षा के साथ-साथ डॉ. प्रेम सिंह जी के माध्यम से मुझे सच्चर साहब, भाई वैद्य और कुलदीप नैयर जैसे महान व्यक्तित्वों का सानिध्य मिला। उनसे मुझे राजनीतिक समझ विकसित करने, मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने, घंटों पढ़ने और समाज को एक अलग दृष्टि से देखने की प्रेरणा मिली।

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लोहिया से लेकर जेपी और अंबेडकर तक की विचारधारा आज भी हमें यही संदेश देती है कि राजनीति का अंतिम लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक अधिक न्यायपूर्ण, समानतापूर्ण और मानवीय समाज का निर्माण होना चाहिए।

इस शिक्षक दिवस पर मैं अपने माता-पिता, अपने सभी शिक्षकों और उन सभी मार्गदर्शकों को हृदय से नमन करता हूँ, जिन्होंने मेरे जीवन को दिशा दी।

संकल्प यही है—उनसे मिली शिक्षा, विचार और वैचारिक प्रतिबद्धता को अपने राजनीतिक जीवन का मार्गदर्शक बनाकर समाज के लिए संघर्ष करता रहूँ।