मांझी। महान संत धरणी दास द्वारा स्थापित राधे कृष्ण मठ के महंत स्वामी वासुदेव दास 94 वर्ष का मंगलवार की शाम ब्रम्हलीन हो गए। बुधवार को उनके पार्थिव शरीर को स्थानीय राम घाट के समीप पवित्र सरयु नदी में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जल समाधी दे दी गई। इससे पहले महंत के पार्थिव शरीर को सजे धजे रथ पर आसीन कर दर्शन हेतु नगर भ्रमण कराया गया। गाजे बाजे के साथ निकली शव यात्रा में शामिल यूपी तथा बिहार के दर्जनों साधु संत व सैकड़ों ग्रामीण जय श्री राम का जयघोष कर रहे थे। जल समाधि के पूर्व संत महात्माओं ने महंत त्रिभुवन दास के संयोजकत्व में ब्रम्हलीन महंत की आरती वंदना की। शव यात्रा में महंत दिनबन्धु दास श्री कमल नारायण दास श्री राजेश्वर दास श्री श्याम सुंदर दास श्री बालक दास श्री बनारसी दास श्री पतइया बाबा महंत प्रेम दास श्री रामसेवक दास श्री तातम्बरी बाबा मौनिया बाबा रामायण दास के अलावा नवरत्न प्रसाद मुखिया मनोज प्रसाद सरपंच सत्यनारायण प्रसाद यादव अख्तर अली कृष्णा सिंह पहलवान डॉ आर बी सिंह नागेन्द्र ठाकुर धनश्याम ओझा मो असलम मुजम्मिल हुसैन ओम प्रकाश गुप्ता जवाहर प्रसाद आदि सैकड़ों लोग शामिल हुए।

महंत जी को मौत के बुलावे का हो गया था आभास

महंत वासुदेव दास मंगलवार को पूरे दिन अपने शिष्यों तथा शुभचिंतकों को बारी बारी बुलाकर उन्हें आशीर्वाद दिया। शाम सात बजे भगवान की आरती सम्पन्न कराने में हाथ बंटाया। ततपश्चात महंत वासुदेव दास ने अपने परम शिष्य त्रिभुअन दास को बुलाकर कहा कि मेरे शरीर के सभी वस्त्र झटपट हटा दो तथा आसन लगा कर मुझे उसपर आसीन करा दो। ईश्वर का बुलावा आ गया है। मैं अपना चोला छोड़ रहा हूँ। ये महंत जी के अंतिम वाक्य थे। और महज दो मिनट में महंत जी की सांसें थम गई। वहां मौजूद सभी लोग अवाक रह गए।