
दैनिक खोज खबर/भेल्दी(सारण)।हमारे असली हीरो सलमान नहीं श्रीराम व गौतम बुद्ध है।बिना सत्संग के विवेक होने वाला नहीं है।विवेक पैदा करने के लिए जगह-जगह राम कथा होनी चाहिए। सूर, तुलसी, विवेकानंद, बुद्ध के आदर्शो को अपनाएं। जीवन जीने के सलीके को सिखे।
उक्त बातें यूपी के प्रख्यात कथा वाचक अखिलेश मणि शांडिल्य ने गड़खा हनुमान नगर में आयोजित 32 वें वार्षिक सत्संग सम्मेलन में ब्याख्यान देते हुए कहीं।उन्होंने कहा कि तमाशा धर्म नहीं है।महादेव वहीं होता है जो समाज के लिए जहर पी ले।विद्याभूषण जी महाराज ने कहा भगवान को मान लेना ही भक्ति है।भक्ति के चार प्रकार है।नाम रूप लीला धाम।यही भक्ति की धारा है।आनंद ही भक्ति की धारा है।सुपौल की कथा वाचिका मीरा देवी ने कहा कि भगवान की शरणागत होने पर ही ईश्वर की कृपा बरसती है।कृपा पात्र बनना ही शरणागति है।सारण की सनातनी चित्राली उपाध्याय ने कहा कि भगवान व भक्त का मिलन ही अरदास है।कथा आपके मन को शांत कर देती है जबकि गाली आपके मन को अशांत कर देती है।सत्संग सम्मेलन में सुश्री चित्राली उपाध्याय, मीरा सिन्हा, शत्रुघ्न दास जी महाराज, कीर्तन सम्राट पवन तिवारी ने कार्यक्रम को प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।मंच संचालन पत्रारकार जेश उपाध्याय ने किया।




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