दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट:-
मंगलवार के दिन माले कार्यकर्ताओ ने भु- राजस्व व भुमी सुधार को लेकर सात दिनो का विशेष भुमी-सत्र आयोजित करने तथा गरीबो को जमीन से बेदखली पर रोक लगाने और चम्पारण मे लैंड ट्रिब्यूनल गठीत करने के मांग को लेकर पोखरा चौक से प्रखंड स्तरीय भूमि अधिकार मार्च निकाला जो शहर के मुख्य सड़क होते हुए शहीद भगतसिंह चौक पहुंचा और सभा मे तब्दील हो गया• सभा को सम्बोधित करते हुए भाकपा-माले खेग्रामस राज्य परिषद सदस्य कामरेड मुख्तार मिया ने कहा की अजादी के बाद आज तक बिहार में भुमी सुधार कानून लागू नही हो सका है और इस प्रकार बिहार में भुमी समस्या विकराल रूप धारण कर चुका है, तथा आज विधानसभा मे अन्य विषयो के साथ थोड़ा समय के लिए ही “भू-राजस्व व भुमी सुधार पर चर्चा होना तय है• आगे माले नेता मुख्तार मिया ने कहा माननीय उच्च न्यायालय ने यह साबित किया है की रामनगर राजघराने के सदस्यों के नेपाल में नागरिकता होने के बावजूद वह आज गौनाहा प्रखंड के धमौरा पंचायत के हजारो एकड़ जमीन पर कब्जा जमाये हुये हैं•
वही सभा को सम्बोधित करते हुए माले नेता नजरे आलम ने कहा की डी• वन्धुउपध्याय भूमी आयोग के अनुसार 21 लाख एकड़ से अधिक सेलिंग से फाजिल, बेनामी, गैरमजरूआ आदि श्रेणी की जमीन बड़े भु-पतीयों, चीनी मिलों व भु-माफीया के पास है और कब्जा जमाये हुये हैं एवम गरीब,दलीत व मजदुर सड़क के किनारे व स्टेशन पर अपना जिन्दगी गुजारने पर मजबुर हैं जो कि समाजिक न्याय बराबरी तथा सच्चे लोकतंत्र के लिए बाधक है• चाहे वह नरकटियागंज प्रखंड के सेमरा मंगल चौक के सरकारी जमीन, गौनाहा प्रखंड के धमौरा पंचायत के रामनगर स्टेट की जमीन या फीर मैनाटाढ प्रखंड के चिउँटाहा, सिंहपुर की जमीन हो बिना भुमी सुधार के सम्भव नही है. भुमी अधिकार मार्च में भाकपा-माले नेता नजरे आलम, नन्दकिशोर, युनुस मिया, राजकुमार, काशी सिंह, ऐपवा नेत्री कुसुम देवी आदी सैकड़ो के संख्या मे माले कार्यकर्ता शामिल थे.




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