नवादा : नव दम्पतियों के प्रयास से प्रजनन स्वास्थ्य होगा बेहतर

रिपोर्ट – सन्नी भगत

मिशन परिवार विकास कुल प्रजनन दर को कम करने के लिए संकल्पित

ロ प्रजनन दर में कमी से आयेगी मातृ मृत्यु दर में कमी

‘अंतरा’ और ‘छाया’ बच्चों में अंतर रखने में कर रही सहयोग

नवादा / (3 मार्च ,2019) : केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कुल प्रजनन दर(प्रति महिला बच्चों की कुल संख्या) में कमी, आधुनिक गर्भनिरोधों के उपयोग को बढ़ाने, गर्भनिरोधक साधनों की सामुदायिक स्तर पर पहुँच सुनिश्चित करने एवं परिवार नियोजन के प्रति जन-जागरुकता को बढ़ाने के लिए पिछले वर्ष से उच्च प्रजनन दर की सूची में शामिल अन्य राज्यों के साथ बिहार में भी मिशन परिवार विकास शुरुवात किया गया है.कुल प्रजनन दर में कमी जनसंख्या स्थिरीकरण के साथ प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर करने एवं मातृ मृत्यु दर में वांक्षित कमी लाने में अहम् भूमिका अदा करती है. परिवार नियोजन कार्यक्रमों को सफ़ल बनाने में सरकारी प्रयासों से इतर आम लोगों की सामाजिक एवं नैतिक ज़िम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है .इसके लिए नव दम्पन्तियों द्वारा माता एवं शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरुरी बच्चों में सही अंतराल के लिए गर्भनिरोधक साधनों का चयन एक प्रभावी एवं सकारात्मक कदम साबित हो सकता है.कुल प्रजनन दर में कमी है जरुरी: सैंपल रेजिस्ट्रेसन सर्वे-2016 के आंकड़ो के अनुसार बिहार की कुल प्रजनन दर 3.3 है जिसका अर्थ है कि प्रति महिला बच्चों की संख्या 3.3 है. वहीं देश में प्रति महिला बच्चों की संख्या 2.3 है. जहाँ एक तरफ़ प्रजनन दर में वांक्षित कमी आने से दो बच्चों के मध्य अंतराल बढ़ेगा तो दूसरी तरफ़ इससे प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में भी कमी आयेगी. बच्चों में कम अंतराल होने के कारण अनीमिया, प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्त स्त्राव एवं अन्य प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव होने के साथ मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी कमी आती है.नव दम्पति के कन्धों पर है अधिक ज़िम्मेदारी: परिवार नियोजन की नींव को मजबूती प्रदान करने में नव दम्पतियों की भूमिका प्रमुख हो जाती है. नसबंदी की तुलना में गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग आसान एवं एक हद तक कुल प्रजनन दर को नियंत्रित करने वाला भी होता है. इसे नव दमप्तियों की जागरुकता एवं सही जानकारी के सहारे आसानी से सुनिश्चित किया जा सकता है. पहले बच्चे के जन्म के बाद दूसरे बच्चे में लगभग 2 सालों का अंतराल माता के बेहतर स्वास्थ्य के साथ शिशु के उत्तम स्वास्थ्य के लिए जरुरी माना जाता है. इस अंतराल में माता का शरीर पुनः माँ बनने के लिए तैयार होता है. बच्चों में अंतराल कायम करने के लिए अस्थायी गर्भनिरोधकों के चयन में नव दमप्ती का निर्णय महत्वपूर्ण हो जाता है.राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 4(2015-2016) के आंकड़ों के अनुसार नवादा में 30.6 प्रतिशत लोग किसी भी प्रकार के परिवार नियोजन साधनों का इस्तेमाल करते हैं एवं केवल 29.1 प्रतिशत लोग ही नवीन परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं. ‘अंतरा’ एवं ‘छाया’ कर रही सहयोग: मिशन परिवार विकास के तहत बच्चों में अंतराल एवं अनचाहे गर्भ से बचाव के लिए दो नवीन गर्भ निरोधक- ‘अंतरा’ एवं ‘छाया’ की शुरुवात प्रदेश के सभी जिलों में की गयी है.‘अंतरा’ एक गर्भनिरोधक इंजेक्शन है जिसे एक या दो बच्चों के बाद गर्भ में अंतर रखने के लिए दिया जाता है.इस तरह साल में चार इंजेक्शन दिया जाता है. ‘छाया’ गर्भनिरोधक टेबलेट है जिसका सेवन हर चार दिन में करना होता है. साथ ही एक महीने तक यह टेबलेट खानी होती है. इसकी निःशुल्क उपलब्धता पीएचसी, सीएचसी एवं सदर अस्पतालों में सुनश्चित कराया गया है. साथ ही सरकार द्वारा अंतरा इंजेक्शन लगवाने पर लाभार्थी को 100 रूपये एवं प्रेरक को भी 100 रूपये दिए जाने का प्रावधान किया गया है.