मांझी(सारण)। बिहार व यूपी को जोड़ने वाले अति महत्वपूर्ण जयप्रभा सेतु की दयनीय जर्जर स्थिति का मुद्दा लोक सभा में भी गूंजा। 5 नवंबर को महारजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल ने नियम 377 के तहत इस मुद्दे को उठाते हुए लोक सभा में सदन का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि मांझी बिहार व यूपी के लोगों के मन व मिजाज को मिला कर चलने वाला एक ऐसा सीमावर्ती ऐतिहासिक स्थल है। जहां से होकर प्रभु श्रीराम की जन्म-स्थली से प्रवाहित होने वाली पावन सरयु नदी बहती है। इसी नदी के ऊपर देश के प्रथम व द्वितीय आजादी के नायक एवं सम्पूर्ण क्रांति के प्रणेता जयप्रकाश नारायण एवं उनकी पत्नी प्रभावती जी के नाम पर जयप्रभा सेतु है। जिसके शिलान्यास, निर्माण व शुभारंभ की कहानी अपने आप में अनोखी है। इस सेतु का निर्माण देश के अमर पुत्र पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी के अथक प्रयास से हुआ था। जो पिछले पांच वर्षों में क्षतिग्रस्त होकर बुरी तरह से जर्जर स्थिति में पहुंच गया है। इसकी पश्चिमी हिस्से की रेलिंग महीनों पूर्व से टूटी पड़ी है। सेतु-सड़क पर बने असंख्य गड्ढों के कारण अब तक हुई दुर्घटनाओं में 24 लोगों की जानें जा चुकी है। अतः जनहित में भारत सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय से अनुरोध है कि उक्त सेतु से गुजरने वाली सड़क जो (एनएच-31) एनएचआई के अधीन है कि मरम्मती शीघ्रताशीघ्र कराये जाने को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाये जायं।